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प्यासी औरत ( pyasi ourat )

Saturday, December 20, 2014

मैं 25 साल का जवान युवक हूँ, मेरी लम्बाई 5.6 इंच है, पेशे से मैं एक कम्प्यूटर हार्डवेयर इंजीनियर हूँ। मेरा कमरा तीसरी मंजिल पर है और खिड़की की विपरीत दिशा में मेरा कम्प्यूटर रखा हुआ है
और सामने की छत से कम्प्यूटर की स्क्रीन साफ-साफ दिखती है। मैं रोज उसमें नग्न तस्वीरें देखता हूँ। सामने की छत पर एक औरत रोज कपड़े सुखाने आती है। मुझे नहीं पता था कि वो रोज मुझे छुप कर देखती थी।
एक दिन मैंने उसे ऐसा करते देखा लिया, तब से मैं उसे रोज छुप कर देखने लगा, मुझे वो अच्छी लगने लगी। मैंने उसके बारे में पता किया तो पता चला कि उसका नाम मीनाक्षी है और वो पेशे से अध्यापिका है और उसका पति एक बड़ा व्यापारी है लगभग 44-45 साल का। बहुत अमीर लोग थे वो।
मीनाक्षी लगभग 34-35 साल की होगी पर भगवान ने उसे क्या बनाया था, एक-एक अंग को जैसे सांचे में बनाया हो। उसके बदन का आकार 36-32-36 होगा, उसके मोमे इतने मोटे थे कि जैसे किसी गंजे आदमी का सर, उसकी ग़ाण्ड ऐसी उठी थी कि जैसे हिमालय के दो विशाल पर्वत !
जब मैंने उसे पहली बार देखा तो देखता ही रह गया। जब वो साड़ी पहनती थी तो क्या कयामत लगती थी ! मैं तो बस उसी को चोदने के सपने देखने लगा।
अचानक भगवान ने मेरी सुन ली।
एक दिन उनके घर में बिजली से शॉट सर्किट हुआ और घर का कम्प्यूटर जल गया। मेरी गली में एक बिजली का काम करने वाला लड़का रहता है, वो मेरा अच्छा दोस्त है। वो वहाँ गया, उसने बिजली तो ठीक कर दी पर कुछ समान लेने वो बाजार चला गया बिजली आने के बाद जब कम्प्यूटर चालू नहीं हुआ तो उन लोगों ने अपने कम्प्यूटर वाले को फोन किया।
इंजीनियर आया, देख कर बोला- कम्प्यूटर तो पूरा जल गया है, इसका कुछ भी नहीं हो सकता।
इतना सुनते ही मीनाक्षी रोने लगी तो उसके पति ने कहा- मैं दो-तीन कम्प्यूटर वालों को जानता हूँ !
उसने एक-एक करके सभी को बुलाया पर सबने जवाब दे दिया। मीनाक्षी रोना सा मुँह लेकर बैठ गई। शाम को मेरा एक दोस्त उनके कम्प्यूटर को देखने आया, उसने यह सब देखा और कहा- मेरा एक दोस्त कम्प्यूटर ठीक करता है, आप कहें तो मैं उसे बुलाऊँ?
उसने मुझे फोन किया, मैं उसके घर गया तो वो मुझे देखा हैरान हो गई। पर वो रोए जा रही थी।
मैंने कम्प्यूटर देखा, पावर सप्लाई, मदरबोर्ड़ की दो आई-सी और हार्डडिस्क का लॉजिक कार्ड जल चुके थे।
मैं बोला- सब जल गया है, ज्यादा खर्च होगा, आप नया क्यों नहीं ले लेते?
इतना सुनते ही मीनाक्षी रोने लगी।
मैंने पूछा- ऐसा क्या है इस कम्प्यूटर में जो आप इतना परेशान हैं?
मीनाक्षी बोली- मैं एक स्कूल टीचर हूँ और इसमें स्कूल के बच्चों के पेपर हैं और दो दिन बाद मुझे ये प्रैस में छपने के लिये देने थे। अगर समय से नहीं छपे तो बच्चे पेपर कैसे देंगे? और मैं अकेली दो दिन में इतने सारे पेपर तैयार नहीं कर सकती। मुझे तो स्कूल वाले नौकरी से निकाल देंगे।
मैंने कहा- कोई बात नहीं ! मैं देखता हूँ ! आप परेशान मत हों !
मैंने कम्प्यूटर उठाया और नेहरू प्लेस से उसका पावर सप्लाई और मदरबोर्ड ठीक करवा दिये और कम्प्यूटर को अपने घर ले आया। मेरे पास उसी कंपनी की वैसी ही एक हार्ड-डिस्क और थी मैंने उसका कार्ड उस खराब हार्ड-डिस्क में लगा दिया और किस्मत की बात है जो वो कार्ड चल गया और कम्प्यूटर चालू हो गया। यह सब करने में मुझे रात के दो बज गए थे।
मैंने उसी समय मीनाक्षी को फोन किया- आपकी मशीन ठीक हो गई है।
मीनाक्षी बोली- मुझे यकीन नहीं होता ! इसे तो सबने माना कर दिया था ! मुझे अभी देखना है। आप कम्प्यूटर चालू करो मैं छत पर आती हूँ, छत से तुम्हारे कमरे का कम्प्यूटर स्क्रीन साफ दिखता है।
वो छत पर आई और अपना कम्प्यूटर चलता देखा बहुत खुश हुई।
मैंने कहा- सुबह मैं आपका कम्प्यूटर दे दूँगा।
रात को मैंने उसकी हार्ड डिस्क का डाटा देखा, मैं तो देख कर हैरान रह गया, इसमें तो बहुत सारी ब्लू फिल्में थी।
सुबह मैंने उसका कम्प्यूटर दे दिया। उसने उसी समय सारे पेपर प्रैस वाले को मेल किये और फिर खुश होकर बोली- हाँ तो अभय जी, क्या लेंगे चाय या कॉफी?
मैंने मन ही मन कहा- मन तो तेरी चूत लेने को कर रहा है, पर भगवान ने मेरी ऐसी किस्मत नहीं बनाई।
मैंने कहा- जी, कुछ नहीं !
मीनाक्षी ने कहा- आपने इसमें कुछ देखा तो नहीं?
मैंने हँसते हुए कहा- अब मरीज़ डॉक्टर के पास आया है तो डॉक्टर उसे पूरी तरह देखेगा, तभी तो इलाज होगा न !
उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया, वह बोली- तो आपने वो सारी ब्लू फिल्में देख ली?
मैं- हां !
कुछ देर कमरे में शांति रही और फिर मैंने डरते हुए पूछा- एक सवाल पूछूं? आप बुरा तो नहीं मानेंगी?
मीनाक्षी बोली- नहीं !
मैं- क्या आप मुझे अपनी छत से रोज़ देखती है जैसे रात देखा था?
मीनाक्षी- हां, और आप रोज़ कम्प्यूटर पर ब्लू फिल्में देखते हैं।
मैं कुछ डर सा गया।
मीनाक्षी- डरो मत, ब्लू फिल्में तो मुझे भी अच्छी लगती हैं और हर इंसान की अपनी-अपनी पंसद होती है।
कुछ देर बाद मीनाक्षी बोली- आज आपने मेरी नौकरी को बचाया है, बोलिए मैं आपके लिये क्या कर सकती हूँ? अगर मैं आपके कुछ काम आ सकती हूँ तो मुझे बहुत खुशी होगी।
मुझे लगा कि किस्मत एक बार फिर वही खेल खेल रही है जो 6 साल पहले खेला था, मैं अपने आपको फिर दुख नहीं पहुँचाना चाहता था इसलिए मैं गुस्से में उठा और बाहर चला आया।
उसने मुझे रोकना चाहा पर मैं नहीं रुका।
मैंने कहा- मुझे काम है।
शाम को उसका फोन आया, मैंने नहीं उठाया। फिर अगले दिन उसका फिर फोन आया, मैंने फोन उठाया।
मीनाक्षी- क्या हुआ? आप ऐसे क्यों चले आए? मुझे पता है कि आपको काम नहीं था, मेरी कोई बात बुरी लग गई आपको?
मैं- कोई बात नहीं ! मैं कल कुछ उदास था और आपने कहा कि मैं आप के लिये क्या कर सकती हूँ तो मुझे किसी की याद आ गई।
मीनाक्षी- बहुत प्यार करते थे?
मैं- हां !
मीनाक्षी- अब कहाँ है वो?
मैं- यहीं, इसी शहर में !
मीनाक्षी- क्या वो तुमसे मिलती है?
मैं- नहीं ! वो मुझे मिलना नहीं चाहती।
मीनाक्षी- कोई बात नहीं ! तो तुम किसी और लड़की से दोस्ती कर लो।
मैं- मुझसे कौन दोस्ती करेगा?
मीनाक्षी- तुम उदास मत हो, मैं हूँ ना ! आज से मैं तुम्हारी दोस्त हूँ।
मैं- आपके अपनेपन के लिये शुक्रिया ! पर देवी जी, मुझे एक दोस्त से भी ज्यादा चाहिए।
मीनाक्षी- इसका जवाब मैं कल दूंगी।
उस रात मैं सो नहीं पाया, भगवान का शुक्रिया करता रहा कि चलो लड़की नहीं तो औरत तो मिली इतने सालों के बाद।
उसी रात को उसका एस एम एस आया कि तुम्हें एक औरत चलेगी?
मैंने जवाब में इतना लिखा कि दोस्ती और प्यार में उम्र नहीं देखी जाती।
रात को ही उसका फोन आया।
मीनाक्षी- कैसे हो?
मैं- ठीक हूँ, आप कुछ जवाब देने वाली थी? और आपके पति कहाँ हैं?
मीनाक्षी- वो सो रहे हैं। तुम्हें एक बात बताती हूँ, मैं एक गरीब परिवार से हूँ और पैसे के लिये मैंने इनसे शादी तो कर ली पर ये बूढ़े हो गए हैं और मैं प्यासी रह जाती हूँ, और आज भी प्यासी हूँ। जब तुमने मुझे कहा कि तुम्हारी भी एक दोस्त थी जो अब नहीं है तो मुझे लगा कि तुम भी मेरे तरह प्यासे हो।
मैं- मीनाक्षी, मुझे नहीं पता था कि तुम इतनी दुखी हो, तुम्हारे आगे तो मेरा दुख कुछ भी नहीं ! मैं तो नदी से दूर हूँ पर तुम तो नदी में रहकर भी प्यासी हो ! अगर मैं तुम्हारे लिये कुछ कर सकता हूँ तो बताओ?
मीनाक्षी- ठीक है ! परसों रात को मेरे पति कुछ काम से बाहर जा रहे हैं और अगले दिन रात को आएँगे, तुम रात में आ जाना, मैं दरवाज़ा खोल दूंगी।
मैं- मीनाक्षी, अब तू दुखी मत हो ! मैं तुम्हें और प्यासा नहीं रहने दूँगा। अब से तुम्हारे सारे दुखों का अंत हो गया समझो।
मीनाक्षी- मुझे नहीं लगता था कि यह दिन भी आएगा।
तभी अचानक मीनाक्षी का पति उठ कर पानी पीने उठा और मीनाक्षी ने फोन काट दिया।
अगले दिन उसका फोन आया शाम को।
मीनाक्षी- हैलो, क्या हाल है?
मैं- ठीक हूँ, बस आप के ही ख्यालों में जी रहे हैं।
मीनाक्षी- अच्छा, एक खुशखबरी सुनो ! मेरे पति आज ही जा रहे हैं।
मैं- मुबारक हो।
मीनाक्षी- अच्छा, तुम आज ही आ सकते हो?
मैं- ठीक है, कब?
मीनाक्षी- रात में 10 बजे।
मैं- ठीक है।
रात लगभग 9.30 बजे उसका फोन आया और मैं उसके घर के पीछे के दरवाजे से अंदर गया।
अंदर जाकर मैं उसे देख कर हैरान हो गया, उसने काले रंग की साड़ी पहनी थी और उसका पल्लू आधी छाती को ही छुपा रहा था और उसके दोनों मम्मे लगभग आधे बाहर थे, मम्मों के ऊपर का हिस्सा क्या कमाल का लगा रहा था, एक दम गोरे-गोरे !
मैं उसके पास गया और उसके होटों पर एक अपने होटों को रख कर एक जोरदार चुम्बन लिया। वो मेरी बाहों में झूल गई।
मैं उसे उठा कर कमरे में ले गया, उसने टी वी पर ब्लू फिल्म लगा दी।
फिर उसने मुझे अपने हाथों से खाना खिलाया। फिर हम दोनों एक दूसरे से चिपक गए। मैंने उसके होटों पर चूमा, फिर गर्दन पर फिर मैंने ब्लाउज़ उतार दी। उसने अंदर ब्रा पहनी थी। फिर मैंने उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके चूचों को दबाया। ऐसी कसी छाती तो मैंने तब तक न ही दबाई और न ही देखी थी।
उसके मुँह से आह-आह की आवाज निकलने लगी, वो बोली- मेरे राजा, आराम से दबाओ। साल बहनचोद मेरा पति कभी इन्हें छूता भी नहीं है !
फिर मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी, क्या मस्त मम्मे थे उसके !
मुझसे रहा नहीं गया, मैंने एक को मुँह में लिया और दूसरे को हाथ से दबाया। फिर मैंने उसका पेटेकोट का नाड़ा भी खोल दिया और अपना एक हाथ धीरे-धीरे उसके पेट से फिराते हुए उसके पेटीकोट के अंदर डाल दिया और उसकी जांघों को सहलाने लगा, फिर उसके पेट पर चूमा और उसका पेटीकोट उतार दिया।
अंदर उसने कच्छी पहन रखी थी। मैंने उसकी जांघों पर चूमा और उसकी कच्छी भी उतार दी। अंदर तो मामला एक दम साफ था, लगता था कि आज ही सफाई की हो !
फिर मैंने उसकी चूत में उंगली डाली और उसके ऊपर लेट कर उसकी चूत के दाने को हिलाता रहा। जैसे-जैसे उसकी चूत में उंगली हिलाता, वैसे-वैसे उसके मुँह से आह-आह की आवाज आ रही थी।
थोड़ी देर मैं मुझे उसकी चूत कुछ गीली-गीली लगी और वो झड़ गई।
अचानक वो बोली- बहन के लौड़े ! क्या तुझे उंगली से चोदने के लिए बुलाया है?
मैं बोला- इंतज़ार करो मेरी रानी ! मैं तुम्हारे पति की तरह नहीं हूँ जो सिर्फ सपने बारे में ही सोचूँ ! सिर्फ खुद मजे लूँ और तुम्हें प्यासा रखूँ। असली मज़ा तो आना बाकी है !
फिर मैंने अपने कपड़े उतारे और कच्छे में ही उसके ऊपर चढ़ गया, उसकी जांघों को सहलाया और उसकी चूत को चूम कर उसकी चूत में अपनी जीभ घुसा दी। उसके कूल्हों को पकड़ कर अपनी जीभ को अंदर-बाहर करने लगा। चूत का पानी कुछ नमकीन सा लगा पर मैं उसे पीता चला गया। जैसे-जैसे मैं जीभ को अंदर-बाहर करता, उसके मुँह से आह-आह की आवाज निकल रही थी।
उसने मेरे सर के बाल इतनी ज़ोर से पकड़ लिए कि शायद कुछ बाल उसके हाथ में भी आ गए, मैंने मन ही मन सोचा कि शायद शादी के बाद कुछ लोग इसी तरह से गंजे हो जाते हैं।
थोड़ी देर में ही वो दूसरी बार झड़ गई।
उसने थोड़ी देर आराम किया, फिर बोली- तुमने तो मुझे बिना चोदे ही शांत कर दिया !
मैंने कहा- अभी तो तुम्हें चोदना है ! यह तो तुम्हें गर्म करने के लिए था !
मैंने उसके होठों पर चूमा, उसने अपना हाथ मेरे कच्छे में डाल दिया और मेरे लण्ड पकड़ लिया। मैंने अपना कच्छा उतार दिया। उसने लौड़े को पकड़ कर कहा- साला मेरा पति तो कभी इसे पकड़ने ही नहीं देता है ! उसे क्या पता कि इसे पकड़ने में औरत को वही मज़ा आता है जो मम्मों को पकड़ने में आदमी को आता है।
फिर उसने मेरा लौड़ा अपने मुँह में ले लिया और ऐसे चूसने लगी जैसे एक छोटा बच्चा लॉलीपोप को चूसता है। क्या मजा आ रहा था, मैं बता नहीं सकता।
फिर मैंने उसे लेटने को कहा, वो लेट गई, मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसके होटों पर चूमते हुए अपने लण्ड को उसकी चूत में डाल कर हल्का सा झटका दिया। लण्ड का टोपा ही अंदर गया तो उसे हल्का सा दर्द हुआ, बोली- उनका लण्ड जल्दी ही झड़ जाता है तो वो ज्यादा अंदर नहीं देते ! इसलिए यह इतनी कसी है।
मैंने और ज़ोर लगाया तो कुछ अंदर गया, उसे दर्द हो रहा था। मैंने एक जोरदार मर्दों वाला झटका दिया तो लण्ड पूरा का पूरा चूत में जा चुका था। उसे दर्द हो रहा था, वो दर्द से तड़प रही थी।
मैंने फिर लण्ड निकाल कर पूरा का पूरा डाल दिया तो इस बार आराम से चला गया। फिर मैंने अपनी गति बढ़ाई और ज़ोर-ज़ोर से उसे चोदने लगा। अब उसे भी मज़ा आने लगा, वह भी गाण्ड उठा उठा कर साथ देने लगी, बोली- मेरे राजा, आज तक मुझे इतना मज़ा कभी नहीं आया था।
तभी मुझे लगा कि मेरा होने वाला है तो मैंने अपने झटके कम कर दिये और मन को कहीं और ले गया। इससे मुझे कुछ समय और मिल गया, इतनी देर में वो तीसरी बार झड़ गई। फिर मैंने अपनी गति बढ़ाई।
कुछ बाद मैं झड़ने लगा तो वह बोली- मेरी चूत में झड़ना ! मुझे तुम जैसा समझदार बच्चा चाहिए !
मैं उसकी चूत में ही झड़ गया।
कुछ देर हम ऐसे ही रहे। उस रात हमने चार बार सेक्स किया। सुबह उसने मुझसे कहा- तुम ही मेरे पति हो ! तुमने मुझे सच्चा सुख दिया है। सच में तुम ही औरत की यौन-भावना को समझ सकते हो।

BAAP NAY APNI MASOOM BETI KO CHODA

Tuesday, November 18, 2014

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मेरी दीदी - Hindi sex kahani

Wednesday, November 12, 2014

मुझे मेरी दीदी बचपन से ही बहुत चाहती थी क्यूंकि मैं घर में सबसे छोटा हूँ। हम दोनो एक ही कमरे में सोते थे और दीदी के 20 साल की होने तक तो हम एक ही बेड प़र सोते थे।प़र एक दिन माँ ने हमे अलग-अलग बिस्तर प़र सोने को कहा। मैंने हमेशा से ही दीदी को चोदने की सोची थी और रात को दीदी के सोते समय उनकी चूचियाँ और चूत कभी कभी दबा लेता था। प़र डर के कारण आगे कुछ नहीं कर पाता था। हाँ, बाथरूम में मुठ ज़रूर मार लेता था। दीदी को चोदने को मेरा बहुत मन करता था।अब भारती दीदी वापस आ गई थी। सो मैं रोज उससे अच्छी अच्छी बातें करने लगा ताकि दीदी को किसी पुरानी घटना की याद न आये।एक दिन भारती दीदी बाथरूम से नहाकर आ रही थी तो अचानक मेरी नज़र उन पर पड़ गई, शायद बाथरूम में तौलिया नहीं था, वो गीले बदन पर गाउन पहने थी। भारती दीदी के कपड़े शरीर से चिपके हुऐ थे और वो बहुत ही सुन्दर लग रही थी।उस दिन फिर से मैंने मुठ मारी।हम दोनों हमेशा कंप्यूटर प़र गेम और चैट करते रहते थे। एक दिन दीदी साथ वाले कमरे में सो रही थी। मैंने कंप्यूटर प़र जानबूझ कर अन्तर्वासना की एक कहानी 'दीदी की चुदाई' पढ़नी शुरू की। अचानक दीदी पास आकर बैठ गई और उसने वो कहानी पढ़ ली उसने मुझसे कहा- तुम यह सब पढ़ते हो क्या?मैं चुपचाप उनको देखने लगा। मैंने मौका देख कर उसके होठों पर चूम लिया। भारती दीदी ने मुझे पकड़ कर अलग कर दिया और कहा- मार खाएगा तू !और दीदी वहाँ से उठ कर जाने लगी। जाते समय मेरी तरफ देख रहस्यमयी मुस्कान दी। मैंने भी मुस्कुराते हुए दीदी की तरफ देखा।थोड़ी देर में दीदी ने मुझे आवाज़ दी और सोने के लिए कहा। मैं सोने आ गया। बातों बातों में दीदी ने मुझे अन्तर्वासना की कहानी के बारे में मुझे पूछा। मैने भी सब बता दिया।दीदी ने मेरी तरफ देखा, मैंने मौका देख कर फ़िर उसके होठों पर चूम लिया। भारती दीदी ने मुझे पकड़ कर अलग करने की कोशिश की लेकिन मैंने उन्हें छोड़ा नहीं और चूमता रहा।मैं भारती दीदी के होठों को अपने होठों से चिपका कर चूमे जा रहा था, वो बेतहाशा पागल हो रही थी।फिर मैंने दीदी के स्तनों की तरफ हाथ बढ़ाया। दीदी के स्तनों अग्र भाग को अपनी उँगलियों से चुटकियों से पकड़ कर गोल गोल घुमाया तो दीदी सिसिया उठी। मैंने दीदी के चुचूक पकड़ लिए थे। उनके चुचूकों को जोर से मींसा तो दीदी फिर से सिसिया उठी, मगर दर्द से। दीदी के चुचूक तन गए थे, जो ब्रा में उभर आये थे। मैंने उन पर अपनी उँगलियों के पोर को गोल गोल नचाते हुए छेड़ा, इसी बीच मैंने दीदी का गाउन उतार कर फेंक दिया। दीदी के कोमल गौर-बदन की एक झलक देखने को मिली।अन्दर दीदी ने काले रंग की ब्रा पहन रखी थी। दीदी ने अन्दर सफ़ेद रंग की पैंटी पहनी थी। मैंने जिंदगी में पहली बार किसी लड़की को इस रूप में देखा था। भारती दीदी का पूरा शरीर जैसे किसी सांचे में ढाल कर बनाया गया था। काली ब्रा में उनके शरीर की कांति और भी बढ़ गई थी। ब्रा के अन्दर दीदी के बड़े बड़े स्तन कैद थे, जो बाहर आने को बेकरार लग रहे थे। मैंने ब्रा के स्ट्रेप को कंधे से नीचे उतार कर स्तनों को ब्रा की कैद से पूरी तरह आजाद कर दिया। भारती दीदी को नग्न देख कर मेरी हालत खराब हो गई। मैंने कभी किसी के स्तनों को छूकर नहीं देखा था फिर से बड़ी बुरी तरह उन्हें मसला।फिर दीदी ने मेरी टी-शर्ट को ऊपर की ओर उठा दिया। दीदी ने अपने हाथों से मेरा अंडरवियर उतार दिया, फिर लिंग को पकड़ लिया। भारती दीदी मेरे लिंग को देखकर आश्चर्यचकित रह गई। दीदी ने लिंग को प्यार से सहलाया। दीदी के हाथ के स्पर्श से ही लिंग में कसाव बढ़ गया। दीदी ने मुस्कुराते हुए मुझको को चूमा। फिर दीदी तुरंत उसे चूसने लगी। दीदी को इस तरह से करते हुए देख मजा आ रहा था। दीदी ने बाकी लिंग को बाहर से चाट चाट कर चूसा तो मैं भी उत्तेजना से कांप गया।मैंने उनकी जांघों के ठीक बीच में अपना हाथ फिराया और दीदी की पैंटी की इलास्टिक में उँगलियाँ फंसा कर पैंटी को उतार लिया और हाथों से हल्के हल्के दीदी के योनि प्रदेश को सहलाने लगा तो दीदी गुदगुदी के मारे उत्तेजित हो रही थी।कुछ देर बाद भारती दीदी बहुत ही उत्तेजित हो गई थी हम दोनों ही अब काफी उत्तेजित हो गए थे। अब मैं दीदी की टांगों को फैला कर खुद बीच में लेट गया। मैंने भारती दीदी की योनि को सहलाया, उनके चूत की खुशबू मस्त थी। फिर उस पर पास में पड़ी बोतल से वैसेलिन निकाल कर लगाई। भारती दीदी की चूत का छेद काफी छोटा था। मुझे लगा कि मेरी प्यारी भारती दीदी मेरे लण्ड के वार से कहीं मर न जाये।दीदी उत्तेजना के मारे पागल हो रही थी। दीदी ने मुझे लण्ड अन्दर डालने के लिए कहा।भारती दीदी की योनि को अच्छी तरह से वैसेलिन लगाने के बाद फिर से दीदी की टांगों के बीच बैठ गया। मैंने दीदी की कमर को अपने मजबूत हाथों से पकड़ लिया। मैंने कोशिश करके थोड़ा सा लिंग अन्दर प्रवेश करा दिया। दीदी हल्के हल्के सिसकारियाँ ले रही थी। फिर मैंने एक जोरदार झटका मारकर लिंग को काफी अन्दर तक योनि की गहराई तक अन्दर पहुँचा दिया कि दीदी की चीख निकल गई।मैंने दीदी के चेहरे को देखा तो मैं समझ गया कि दीदी को दर्द हो रहा है। मैंने दोबारा वैसा ही झटका मारा, तो दीदी इस बार दर्द से दोहरी हो गई। मैंने यह देख कर उनके होठों पर चूम लिया वरना दीदी की आवाज़ दूर तक जाती।दीदी एक मिनट में ही सामान्य नज़र आने लगी क्योंकि उनके मुँह से हल्की हल्की उत्तेजक सिसकारियाँ निकल रही थी। मैंने फिर से एक जबरदस्त धक्का मारा, दीदी इस बार दहाड़ मार कर चीख पड़ी। मैंने देखा कि इस बार दीदी की आँखों में आँसू तक आ गए थे। मैंने दीदी के होठों को अपने होठों से चिपका लिया और जोर-जोर से उन्हें चूमने लगा और साथ ही दीदी के स्तनों को दबाने लगा। दीदी भी उतनी तेजी से मुझे चूम रही थी।मैं हल्के हल्के अपनी कमर चला रहा था। अब दीदी धीरे धीरे सामान्य होती लग रही थी। मुझे इतना समझ आया कि जब दीदी को दर्द कम हो रहा है। दीदी ने अपने टांगों को मेरी कमर के चारों ओर कस लिया। मैंने ने दीदी के होठों को छोड़ दिया और पूछा- अब मज़ा आ रहा है क्या ? दर्द तो नहीं है ?दीदी बोली- आराम से करते रहो ! मैंने एक जोरदार झटका मारकर अपना लिंग दीदी की योनि में काफी अन्दर तक ठूंस दिया। इस बार दीदी के मुँह से उफ़ भी नहीं निकली बल्कि वो आह.. सी.. स्स्स्स...सस... की आवाज़ें निकाल रही थी।दीदी बोली- मुझे बहुत अच्छा लग रहा है !यह देखकर तीन चार जोरदार शॉट मारे और लिंग जड़ तक दीदी की योनि में घुसा दिया और अपने होठों को दीदी के होठों से चिपका उनके ऊपर चित्त लेटा रहा।अब झटकों की गति और गहराई दोनों ही बढ़ा दी। आधे घंटे त़क दीदी के रास्ते में मैं दौड़ लगाता रहा फिर दीदी ने अपनी टाँगें ढीली कर ली। दीदी स्खलित हो गई थी। कुछ ही देर में मेरा शरीर ढीला हो गया। काफी देर मैं दीदी के ऊपर लेटा रहा। दीदी मेरे होठों को बार बार चूम रही थी और आत्मसंतुष्टि के भाव के साथ मुस्कुरा रही थी। मैंने दीदी के कामरस को खूब पिया उन्होंने मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत में चिपका दिया था। भारती दीदी को रात में 3 बार चोदा। हर रात मजा कर रहा हूँ।

Sasur Ke Sath Mast Chudai - Hindi Sex Stories

Thursday, September 25, 2014

mera naam mona hai mai 29 saal ki hu. mai ek shadisudha aurat hu. ye un dino ki bat he jab me ek nai dulhan banke sasural gayi ti pati ke sat sex karne me bahut maza aati ti ham tabhi din me kamse kam 8 bar sex karte the badme kam ke silsile me hamare patiji ko foreign jana pada me bilkul akeli si ho gai thi.ungliyon se apni chut ki pyaas bujati ti me tabhi ek din gar me me or mere sasur akele te saas ko kahi puja me jaana pada me ne papaji ko chai pilayi or apne room me letne gayi tabhi mujhe sex karne ka bahut man kar raha ta tabhi me waha pada ek perfume ki bottleko lund samajkar apne chut me dalne ki koshish kiya bahut maza aa raha ta me usse apne chut me jhatke diye ja rahi thi me bhul gayi thi ki darwaza mene band nahi kiya he or mere sasurji sab dekh rahe the vo kuch kam se apne kamre me ja rahe the to darwaza khulla dek vo andar aaye or hamare live bp dek rahe te mera dyaan nahi ta me apne kam me vyast ti tabhi sasurji paas aaye or palang par bet gaye me unko dekhi to me sharma si gayi.

unhone kaha"sharmaon mat beti aisa hota he pati dur rehta he to masturbation ka sahara lena padta he"mene kuch nahi boli sirf unke taraf dek rai ti vo bole tera chut ekdum mast he,kya me apna ungli dal sakta hu.me to pehle se kisi mard ki pyasi thi mene jaldi se ha kar diya to vo mere paas aaye or mere mu ko chumne lage mere aonthon ko bahut din bad koi aoth ka sahara mila ta meri chut gilli hoti ja rahi ti me control nahi kar pa rahi thi me unke haat ko apne chut ke taraf rak diya to vo bahut pyaar se mere chut ke sath khelne lage kabhi ek to kabhi do tin char ungli dalte gaye mere tan man me rakt ka prabhav bad gaya or me utejit hote ja rahi thi.

mujhe bas unka lund andar gusne ka taras tha me chik padi uh ma kitna maja he sachmuch apke haton me jadu he dhire dhire fir vo mere kapde utarne lage mere blouse bra saadi sab nikal gayi ab me puri tarah nangi unke samne bhaithi thi mere bade bade mamye dekhkar unke aakhen dang reh gaye vo bhi jaldi saara kapde utar liye unka lund baba kamse kam 8 inch hoga or mota tha mere pati ke lund se jyada bada lag raha tha mene kaha papa kitna bada he apka maaji ko kitna maja aata hoga to vo bole ha usko bahut maja aata he isiliye abi bhi har roz chudwati he mujse par mujhe ek jawan chut ki talash thi or vo aaj pura ho gaya he. mene kaha lo papa ji bharke apna kwaaish pura karlo meri or apki dono ki pyaas buj jaye fir vo paas aakar mere chuchi ko bhi dabane lage yaaron kya batao kitna mazaa aa rahi tha maano koi tarzan ho vo fir vo mu me lekar chusne lage bahut jor jor se vo mere mamye ko chus rahe te meri chut geeli hoti ja rai ti me apne ungliyan gusane lagi ye dekhkar vo apne ungli gusa diya mere chut me bahut mazaa aa raha ta me chila utthi ti or jorse se chuso or jor se sasurji apki bahu ki pyaas bujado papa chodo mjhe chodo papa or tarsavon mat papa fir dheere se vo mere har ang ko chum rahe te unka lund pattar ki tarah kadak ho gaya ta vo kafi garam ho gaye fir dheere se vo mere chut ke taraf aakar mere chut ko chatne lage mere gorei chut lal ho rai ti vo mere chut ki paani ko pine lage or zubaan ko mere chut ki hole me dakel liya kya kahu me to mar gayi ti unke sex karne ka tarike me.

mai garm lohe ki tarah garam hone lagi ti bahut chat chatai ke bad vo ghadi aai ab dheere se vo unke 8 inch kada lund ko mere chut ke paas laaye or sehlane lage me mood me aake boli paapa sehlana band karo or abi dal b do kitna pani bahavoge mere chut se vo fir gusana chalu kiya lund paani ke karan aadha aasani se gaya abi aadha baki ta me dard se jhoom ut rahi ti par maja bhi aa rha ta uuhhhhhhhhhhhhhh hhhhaaaaaaaaa haaaaaaaaaaaaaaaaaaa haaaaaaaaaaaaa me gayi ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh chila rai ti baki bhi gus gaya mera har chiz kil ut raha ta mera chut me bahut garmi mehsus ho rai ti bahut mazaa aaya oh ma papa harder or harder fuck me hard ahhhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhh ahhh ahhh ahhh ahh ahh ahh ahhh ahh papa bahut jyada speed me jatke de rahe te mera chut fat raha ta mera kamar duk raha ta par mazaa bahut aa raha ta abi mere chut ki pyaas bhuj gayi he or mere gand ka pyaas bujana ta mene papa ko boli ab chut bas gand maroji,fir me mud gayi or mere komal gand unke taraf rak diya tel ke sahare lund gand me gus gaya kitna jyada dard ho raha ta pehli baar jo gand marwa rahi ti jatke pe jatka mile ja raha ta unhone mere gand me hi jhad diye te gand se todha khun ke sat veerya bhi nikal raha ta me unko dekhke hasi or puchi mazzaa aye kya papa vo bole bahut jyada aj me swarg me ta mere khubsurat beti ko chodne jo mila....fir ek dusre ko chumte huve so gaye thodhi der bad uthke fir chudwayi fir kapde pehenkar chumte huve hall me betke tv dekha.

सुन्दर स्त्री की देह

तन के मिलन की चाह बडी नैसर्गिक है। सुन्दर स्त्री की देह से बढ़कर भ्रमित
करने वाला और कुछ पदार्थ इस संसार में नहीं है। मेरे पिता ईसाई, माता हिन्दू
! मुझ पर हिन्दू संस्कारों की छाया अधिक पड़ी। मेरा विवाह मेरी मां की पसन्द
के एक हिन्दू घराने में हुआ। पत्नी यौवन में नव दाम्पत्य के दिनों में सभी को
बहुत भाती है और सर्वांग सुन्दरी लगती है। कालांतर में मुझे दूसरी स्त्रियां
भी आकर्षित करने लगी। विवाह के बाद दूसरी स्त्रियों से बात कर लेने में कोई
शक़ भी नहीं करता है।
सुजाता, मेरी साली जी, अपनी शादी के बाद भी मुझसे मज़ाक करने में चूकती नहीं।
वह मुझे बहुत भाती है। उसकी बातों की शैली कसमसाहट देती है। मुझे बहुत सतर्क
रहना पड़ता है कि कहीं मेरा अपना दाम्पत्य जीवन भंग न हो जाये।

पिछले रविवार उसे किसी सिलसिले में मेरे शहर आना था। मैने सोचा कि चलो हल्की
फुल्की चुहल होगी ! रस रहेगा !
मैं अपने साढू भाई से तो बातें करूंगा ही ! लेकिन असली आकर्षण सुजाता होगी !
वह शनिवार सांझ को ही सिर्फ अपने बेटे के साथ चली आई। साढू जी को अनायास कोई
काम आ गया था। मुझे हर्षमिश्रित आश्चर्य हुआ।

मैं अपने आफिस के काम काज़ निपटा कर जब घर पहुंचा तो मुझे निराशा हुई कि वह
मेरी पत्नी के साथ बातों में तल्लीन थी। मुझे सादर प्रणाम करने के अलावा उसने
कोई खुशी नहीं दी। मैंने भी उसके और अपने बेटे को गिटार सुनाया और अकेले अपने
कमरे में सो गया। नज़दीक़ी दूसरे कमरे में वे दोनों बहनें खिलखिला कर चटखारे
लेकर बातें कर रही थी। मुझे नींद नहीं आई। ज़ब वे सब सो गई, मैं सुजाता के
ख्यालों में खो गया और निर्वस्त्र हो कर मूड्स कंडोम की चिकनाई के बीच तीव्र
हस्तमैथुन करता रहा। मैने ख्यालों में उसको भरपूर भोगा। फिर एक दो घंटे की
नींद के बाद जागने पर फिर से अनुभव दोहराया। रात में दो बार विसर्जन करके
निढाल हो कर गहरी नींद में सो गया। सुजाता अब सिर्फ एक सपना थी।

सुबह हल्की निराशा थी। लेकिन दरस की चाह तो पूरी होनी ही थी। आज उसे दिन भर
यहीं रहना है यह सोच कर मन को सांत्वना दी। लेकिन रात में जो दो बार रस गिरा
दिया तो अब और कुछ तो होगा नहीं : मौका भी तो नहीं। मैंने भी दिन में अपने
मित्र के पास कुछ परामर्श के लिये समय लिया था सो जाने की योजना बना डाली और
पत्नी को बता भी दी।

तभी स्थिति बदली और मेरी बड़ी बहन अचानक 8 बजे ऑटो से उतरी। वह राखी के
सिलसिले में आई थी। आते ही उसने मेरी पत्नी से बात की और कुछ गिफ्ट खरीदने की
चाह से योजना बनाई कि वह एक घंटे बाद घर से 12 कि.मी. दूर वाले थोक मार्केट
से खरीददारी करने चली जायेगी। मेरी धड़कने बढ़ गई। और सुजाता ? उत्तर मिला वह
घर पर रहेगी और दोपहर का भोजन तैयार रखेगी। मुझे तो मित्र के घर जाना ही था।

साढ़े नौ बजे मेरी पत्नी, मेरा बेटा और मेरी बहन तीनों आटो रिक्शे में चल
दिये, मैं भी उन्हें जाने को तैयार दिखा। तीनों के घर से निकलते ही मैं
उतावला हो गया। अन्दर किचन में जाकर पूछा- सुजाता, मैं निकल रहा हूँ चाय
मिलेगी ?

वह पलट कर मोहक मुस्कान से बोली- क्यों नहीं जीजू ! जो चाहोगे वही मिलेगा ..
मैं तो एक्सपर्ट हूँ ... लेकिन आप भी चले जाओगे तो मैं तो यहाँ अकेली रह
जाउंगी।

मैने कहा- चलो कुछ देर रूक जाता हूँ ! शीनू (बेटा) उठा नहीं ?

बोली- सोने दो न उसे जीजाजी ..वह उठ जायेगा तो आपसे बात भी नहीं कर पाउंगी।
अपनी बात अभी हुई ही कहाँ है ?

मैंने उसके कन्धे पर हाथ रख दिया- हाँ.. ठीक कह रही हो।

मैं उसके और नज़दीक़ आ गया और दोनों हाथ दोनों कन्धों पर रख दिये। वह चाय बनाना
छोड़ कर थोड़ा पीछे खिसक आई और मुझसे लगभग चिपक सी गई। मेरा हाथ बढ़ कर उसकी
हथेलियों तक पहुंच गया, वे परस्पर मिली और एक हो गई। मुझे उत्तेजना बढ़ने लगी।
मैने अपना चेहरा उसके कधे पर रख दिया वह तुरंत पलट कर मुझसे चिपक गई। मैंने
उसे चूम लिया।

"कितनी प्यारी लग रही हो.. लगता है बहुत ही हल्की हो तुम.. "

"उठा कर देखो कितनी हल्की हूँ मैं !"

संकेत बहुत ही उत्तेजक था। मुझसे रहा नहीं गया, मैंने उसे सामने से थाम लिया
और थोड़ा उठा लिया। उत्तेजना बढ़ी तो चुहल का स्तर बढ़ाने का अनैतिक ख्याल आया।
मैने उसे उतार दिया और कहा "फिर से ठीक से उठाता हूँ तुम बहुत ही हल्की हो ।"

उसने कहा "ठीक है ।"

मैंने अबकी बार बहुत झुक कर उसकी साड़ी के नीचे से पिन्डली पर हाथ रख उस पर
हाथ फिसलाते हुए उठाया। हाथ साड़ी के अन्दर ही अन्दर उसकी चिकनी जंघा से
फिसलता हुआ उसके नितम्ब तक पहुंच गया।

सिहरन हुई क्योंकि वह पेंटी वगैरह कुछ नहीं पहने थी।

वह भी चिहुंकी,"क्या करते हो जीजू .. आप बड़े वो हो !"

मैंने क्या किया?

आपने मेरी साड़ी पीछे से बिल्कुल उठा दी थी !

मैंने कहा,"चलो बदला ले लो, तुम भी मुझे इसी तरह उठा लो .. "

वह बोली,"ऐसे तो नहीं उठा पाउंगी !"

मैंने पूछा,"फिर ?"

उसने कहा,"मेरी स्टाइल से !"

मैने कहा," ठीक है ! जैसी तुम्हारी मर्ज़ी !"

उसने मेरी दोनों टांगों के बीच अपने दोनों हाथों की पालकी बनाई और उठाने की
कोशिश जैसे करने लगी। मैं पतला पायज़ामा पहने था और उसके नाज़ुक हाथ मेरे
इलेक्ट्रोड को सहला से रहे थे। देर तक ऐसे ही कोशिश सी करती रही फिर बोली- आप
भारी हो ! मुझसे नहीं बनता, आप ही उठाओ।

मैंने कहा- मैं भी ऐसे ही उठाता हूँ ! और अपने दोनों हाथों की पालकी बना कर
उसकी दोनों टांगों के बीच में डाल दिये। आगे रतिमुख तक मेरा हाथ छू गया। वहाँ
बालों का अहसास हुआ।

तेज़ सांसों के बीच मैने पूछा- क्यों सुजी ये बाल इतने क्यों बढ़ा रखे हैं?

सुजाता का चेहरा शर्म से लाल हो गया और बोली," जीजू ! मैं आपको जान से मार
दूंगी !

तेरे बाल साफ कर दूँ ? हेयर रिमूवर से ? (मैं अब तू पर आ गया था )

बोली- आप बहुत बदमाश हो जिज्जू ! ठीक है ! कहाँ करोगे ?

मैने कहा- मेरे बेडरूम में !

बोली- ठीक है, लेकिन ज़ल्दी करना।

मैंने उसे थामा और लगभग गोद में उठाते हुए अपने कमरे में ले गया।

मैं बोला- ज़ल्दी क्या है .. अभी तेरी दीदी नहीं आने वाली.. देर लगाती है वह
तो.. !

उसके कपड़े ऊपर उठाने में अब दोनों में से किसी को संकोच नहीं हुआ।

मैंने कहा- तू मेरे भी साफ कर देना यार !

वह बोली- क्यों ! दीदी नहीं करती है ? कितने बढ़ चुके हैं? दिखाओ तो ज़रा !

मैंने अब तक उसे पूरा उघाड़ दिया था।

मैंने कहा- तू खुद खोल कर देख ले..हेयर रिमूवर हाथ में लिये मैं सामने खड़ा
था, उसने कहा- नहीं, आप ही दिखा दो..

मैं धीरे-धीरे निर्वस्त्र हो गया, उसने कहा- ठीक तो है... हेयर रिमूवर की
ज़रूरत नहीं ! रख दो.. !

मैं उसकी सहस्त्रधारा को सहलाने लगा .. उसने झटके से उठ कर मुझे चूम लिया। और
पीछे से हाथ डाल खींच लिया। मै उसके ऊपर लुढ़क गया उसके हाथ मेरे लिंग को सहला
रहे थे जिसे मैं अपना राजकुमार कहता हूँ।

मैंने कहा- तेरी राजकुमारी तो बडी प्यारी है !

उसने कहा- तेरा राजकुमार भी तो ! ... बांका.. ! गबरू !!

अब वह भी "तू" पर आ गई थी।

मैंने कहा- दोनों की दोस्ती करवा दें ?

वह बोली- ज़ल्दी करवाओ .. राजकुमारी बैचैन है..

मैंने कहा- रुको ! राजकुमार सेहरा बांध कर आयेगा !

और सिरहाने की ड्रावर में से मूड्स कंडोम निकाला और चढ़ा लिया। सेहरे में
राजकुमार को देख राजकुमारी ने अपने किले के द्वार खोल दिये। और राजकुमार ने
अन्दर जा हलचल मचा दी। कुछ ही पल में हमारे सारे वस्त्र कमरे में यहाँ-वहाँ
बिखर गये।

इतनी आज़ादी दोनों को शायद ही कभी मिली हो।

दोनों गुत्थमगुत्था .. पुराने प्रेमी पहलवानों की तरह... पूरी शैया पर लोटते
रहे.. रात ही हस्तमैथुन किया था बल्कि दो बार किया था तो अभी की मिलन-क्रिया
का कोई छोर ही नहीं आ रहा था। राजकुमार ज़बर्दस्त तना हुआ था। मुझे संतोष हुआ
कि रात के कर्म से हानि के बज़ाय सुख में बढ़ोत्तरी ही हुई है। लगभग 35 मिनट की
लम्बी सुखदाई मस्ती के दौरान हम चूत, लंड, भोसड़ी, चुदाई जैसे वर्जित शब्द
उच्चारते रहे और जितना एक दूसरे को काट खा सकते थे, काटा खाया। जितना अन्दर
उथल पुथल मचा सकते थे, मचाई।

वह मेरे ऊपर बैठी भी और अपनी चूत की भीतरी मालिश/पालिश करती रही।

मैने उसे औरत, घोड़ी, कुतिया, नागिन सभी कुछ बना डाला। लगभग 35 मिनट बाद मेरा
रस निकला .. देर तक निकलता रहा .. दोनों सराबोर हो गये.. कंडोम काफी भारी हो
गया। उसने चिपके हुए ही मेरी पीठ ठोंकी .. मैं भी देर तक उसे चूमता रहा। फिर
हम प्रेम से एक दूसरे की ओर देखते हुए नहाने के लिये उठे।

मैंने अपनी पत्नी को फोन करके पूछा- खाना बन गया क्या ?

वह बोली- आप घर पहुंच जाना ! मै सुजाता को फोन कर देती हूँ, वह आपको खाना
खिला देगी। हमें अभी देर लगेगी क्योंकि अब हम सुरुचि नगर में चाची को देख कर
ही आयेंगे।

तभी सुजाता के मोबाइल पर भी फोन आया कि जीजाजी आ जायें तो खाना खिला देना !
अभी शायद आने में दो घंटे लग सकते हैं।

सुजाता फिर भी बोली- अरे दीदी, मुझे तो किचन में छिपकली का डर लग रहा है, मैं
तो टीवी ही देखती रही। अब जीजाजी के आने के बाद ही खाना बनाउंगी।

पत्नी ने सहमति दे दी। इस वार्तालाप से हम दोनों गद-गद हो गये। अब इत्मीनान
से नहा धो खा सकते हैं और लाड-प्यार कर सकते हैं।

हम दोनों अलफ नंगे बाथ रूम में साथ नहाए ! खुद कोई नहीं नहाया। एक दूसरे को
ही नहलाते रहे। राजकुमार और राज कुमारी को भी किस कराते हुए शावर दिया। एक
दूसरे के अंगों पर भरपूर लाड़ किया, अन्दर तक सफाई की गुलाब, नीबूं वगैरह
निचोड़ कर खुशबू से तर-बतर हो कर एक दूसरे को नहलाया, यूं ही निर्वस्त्र बाहर
आये और चिपके चिपके बेडरूम मे कपड़े पहनने पहुंचे।

मैने कहा- तुम मुझे ठीक से पौंछ दो !

वह लगी मुझे पोंछने .. मैं भी दूसरे तौलिये से उसे पोंछ्ने लगा। हमारे
गुप्तांग अब एक दूसरे की सम्पत्ति हो चुके थे। हमने अपनी अपनी सम्पत्ति को
भली प्रकार पोंछा।

फिर मैंने कहा- इस पर तेल भी लगा दो.. फिर परस्पर तेल लगाने में फिर से
उत्तेजित होने लगे..

वह बोली- जीजू .. अबकी बार बिना कंडोम के..

मैं उसकी बात टाल नहीं सका। अबकी बार सीढ़ी पर खड़े होकर देर तक लता और पेड़ की
तरह एक हो गये। फिर से हमें 20 मिनट लगे। इस बीच हमने आइने के सामने अपने
आपको मस्ताते हुए प्रकृति में समाते हुए देखा।

इस बार भी लिंग भरपूर चुस्त और कड़क था। सुजाता पहले से अधिक मुलायम और रेशम
रेशम थी। अबकी बार मैंने उसे अपने ऊपर लिटा लिया और उसे क्रिया करने को
उकसाया। उसे बहुत मज़ा आ रहा था।

अपनी उत्तेजना की चरम अवस्था में मुझसे बोली- जीजू याद रखना ! मैने तुझे चोद
दिया है।

मैंने कहा- हाँ सुजी .. हमेशा याद रखूंगा कि तू जीती ..।

बोली- जीजू ! एक बार बोल कि मैं सुजी से चुदवा रहा हूँ।

मैंने सुर में सुर मिलाया .. हाँ सुजी .. मैं चुद गया .. तू मेरा रस ले जा..

वो बोली- तू भी मेरा ले..

और हम दोनों पल भर में उत्तेजना के चरम क्षण भोगकर फिर एक बार निढाल हो गये।

मैंने उतर कर कपड़े पहने शू, टाई व पसन्दीदा सेंट से सज्जित हो ड्राइंग रूम मे
आगंतुक की तरह बैठ गया। और.. वह भी परी सी सज़ गई और गुनगुनाते हुए किचन में
व्यस्त हो गई।

यह घटनाक्रम अनूठा था और अविस्मरणीय भी।

हैरानी मुझे अब यह हो रही थी कि उसका नन्हा बालक इतनी देर तक सोता रहा।

Bhabhi aur Bahan - Hindi chudai kahani

Tuesday, September 9, 2014

Mera nam Ritesh hai, M/28/delhi, working in MNC Company, Love to enjoy my life with every bit of second. Mai Delhi mei rahta hoo aur aajtak New Friends Colony, Sarita Vihar mei lagbhag 15 houswewife ko chod chukka hoo aur we meri chudai se bahoot satisfy hoti hai kyunki mai chudai sirf chudai ke liye nahi karta balki pura satisfaction dena meri aadat hai.Sath hi 100% Secracy meri mai maintain karta hoo.Yadi aap call/phone talk/chat karna chahe to mujhe e-mail Karen, mai jawab dunga.

Aapne meri story Meri Teacher ko para aur saraha isliye aapko bahoot bahoot thanks. Jin ladies ki mail mere pas aayee hai mai unko jawab likh raha hoo.Jin housewifes ne call kiya hai unko thanks, pls. aap phir se mail Karen aur usme apna phone no. bhi de taki milne se pahle baten ho sake. Dosto aaj mai aapko ek aisi kahani bata raha hoo jo bilkul real hai……aap sune.

Mai parne ke liye jab pune mei rahta tha to mere flat ke bagal mai ek bhaiya rahte the jaswant bhaiya, unki bibi amnjula jinhe mai bhabhi kahta tha , bari hi sundar aur khusmijaj lady thi. jaswant bhaiya ki ek bahan thi sheela.kuchh din rahne ke baad hum aapsa mei kafi ghul mil gaye the, ek baar jaswant bhaiya aur bhabhi apne village chale gaye. Wahan phone nahi tha, isliye sheela akeli rah gayi.jab bahoot dino tak we wapas nahi aaye to sheela mere pas aayee aur boli ritesh kya tum mere sath gere village chaloge, mere bhaiya aur bhabhi abhi tak nahi aaye ghar se.wo meri bahan jaisi thi, isliye maine use bahan man liya tha. Par paarayee bahan to parayee hi hoti hai.Aur hum chal diye.

Hum dono pahooch gaye. Manjula bhabhi kuch kaam kar rahi thi, Jashvant dikhai nahin de raha tha. Mein ne puchha, “Bhaiya nahin hai ? Kahan gaye ?”
Manjula: “Kyun ? Mein nahin hun kya ? Bhaiya bina nahin chalega ?”
Sheela: “Kyun nahin chalega ? Ham to aapko hi dhundhne aaye the, sheela bahoot udas ho gayi thi, aaplogo ke bina.”
Mein: “Itani dhup men kahan gaye bhaiya ?”
Manjula: “Aur kahan ? Vo bhale un ke khet bhale” kahate kahate Manjula ka chahera udaas ho gya.
Sheela: “Kya hai bhabhi ? Udaas dikhati ho, kya baat hai ?”
Manjula: “Jane bhi dijiye. Ye to har roj ka maamala hai. Aap kya karoge ?”
Mein: “Bata to sahi. Dil halaka ho jaayega.”

Manjula ki aankhen bhar aayi. Mein aur Sheela chaar payi par baithe the. Hamaare bich jamin par vo baith gayi aur Sheela ki god men sar rakh ke ro padi. Mein ne us ki pith sahalai aur aashvaasan diya. Us ne saari baat batayi.

Hua aisa tha ki uske pitaji Surat shahar men chhoti si dukan chala rahe the. Manjula vahin badi hui thi. Jashvant ke saath shadi hone ke baad kisi ne Jashvant ko kaha ki jab kanvaari thi tab Manjula ne ek Ratilal naam ke aadami ke saath chakkar chalaya tha. Bas tab se Jashvant Manjula se khub naraj tha.

Sheela: “Kya sach much tune chakkar chalaya tha ?”
Manjua: “Nahin to. Hamari dukan ke saamane Ratilal ka pan ka galla tha. Us ne bahut try kiye lekin mein ne dad nahin di thi. “
Sheela: “Ratilal ya na Ratilal, tuze kisine choda tha ?”

Mein jara chonk pada. Sheela, lekin aasaani se baat kiye jaati thi.

Manjula: “Kisi ne nahin. Tumaare bhaiya ne …ne pahali bar vo kiya, suhaag raat ko tab khun nikala tha, us ne dekha bhi tha.”
Sheela: “Ab kya karate hain bhaiya ?”
Manjula: “Kuchh nahin. Subah hote hi khet men chale jaate hai aur raat ko aate hai. Khana kha kar khat pat vo kar ke so jaate hai. Na baat na chit, kuchh nahin.”
Mein: “Vo kya ?”
Sheela ne mere jaangh par chapaat lagayi aur boli, “Buddhu kahin ke. Doctor hone vala hai aur itana janata nahin hai. Bhabhi tu ise bata.”
Manjula ka chahera sharm se laal ho gaya, kuchh boli nahin.
Sheela: “Kitane dino se aise chodaten hai ?”
Mannjula: “Do mahine ho gaye”
Mein: “Kis ke do mahine hue ?”
Meri kisi ne suni nahin. Un dono ne ankh se ankh milaayi aur dhire dhire najdik aate aate un ke hoth ek du je ke saath chipak gaye. Mein dekhata hi rah gaya. Un ki kiss lambi chali. Mere laude men jaan aane lagi. Chumban chhod kar Sheela ne mere haah pakad kar Manjula ke stan par rakh diye aur boli, “Us din tu kahata tha na ki tuze stan sahalaane ka dil ho jaata hai, to aaj shuru kar.”
Mein: “Mein to tere stan sahalaane ko kahata tha.”
Sheela: “Bahan ke stan ko bhai nahin chhuta, bhabhi ki baat alag hai. Bhabhi blouse khol de varana ye faad dega.”
Manjula ne blouse khol ke utar diya. Us ke bade bade stan dekh kar mera lund tan gaya. Mere haath dono stan ko dabaane lage. Sheela ne mera lund tatola.
“Aai, Bhai ka…ka…us ko bahan nahin chhuti.” mein ne kaha. Javab diye bina Sheela fir se Manjula ko kiss karane lagi aur mere lund ko mutthi men le kar daboch liya. Mein ne ek haath Manjula ke stan par rakhate hue dusare se Sheela ka stan pakada aur dabaya. Is bar us ne virodh nahin kiya. Achanak us ne Manjula ka munh chhod ke mer munh par apane hoth tika diye. Kisi ladaki ke saath kiss ka mera ye pahala anubhav tha. Mere badan men zurzuri fail gayi aur lund men se paani chhutane laga. Ab Manjula ne mera sar pakad kar apani or khincha aur kiss karane lagi. Sheela ne mera lund fir se pakada aur ghisane lagi. Mein ne jab us ki kudati ke button par haath lagaye tab usne mere haath zatak diya aur khud ne kudati khol di. Us ne bra paheni nahin thi. Us ke nange stan dekh kar mein tajjub rah gaya. Bade santare ki size ke us ke stan gore gore the. Ek inch ki areola ke bich chhoti si nipple thi jo us vakt kadi ho chuki thi. Jab ki Manjla ke stan sine pe niche ki or lage hue the, Sheela ke stan kaafi unche the. Manjula ki nipples aur areola bhi badi badi thi. Hath se Sheela ke stan sahalate hue mein ne zuk kar Manjula ke nipples ko munh men le kar chusa. Sheela ne kab uth kar Manjuka ko chaar paayi par leta diya us ki muze khabar na rahi

“Bhaiya, tum mere pichhe aa jao” kah kar Sheela Manjua ki jaangh par baith gayi. Nadi khol kar us ne apani salvar utari aur aage zuk kar apani bhos se Manjula ki bhos ko ragadne lagi. Mein ne pichhe se us ke stan pakade aur ghundion ko masalne laga. Aage zuki huhi hone se us ke khuli hui gaand mere saamane thi. Mein ne zat se pajama ki nadi khol kar lund bahar nikala aut Sheela ke chutad ke bhich ghis ne laga.

“Abhi thaharo jara, bhaiya. Tume pahale bhabhi ko chodana hai, muze baad men,” kah ke vo jara aage saraki. Manjula ne jaanghen chaudi ki aur mera lund us ki bhos tak pahonch gaya. Manjula aur Sheela kaafi excite ho gaye the. Dono ki bhos giligili ho gai thi. Ek haath se lund pakad kar mein ne laund ka mattha Manjula ki chut men dal diya. Dusare haath se Sheela ki clitoris ko tatolata raha. Ek dhakka jor se lagaaya ki lund bhabhi ki chut men utar gaya. Manjula ne jaanghen upar utha kar sahakar diya. Sheela us ke uapr zuki hui kiss karati rahi thi.

Manjula ke hips hilane lage aur chut men fat fat fatake ho ne lage. Mein ne dhakke ki raftaar badhayi. Manjula jor se zar padi aur shithil ho gayi. Mein ne us ki chut ka ras se gila lund nikala. Sheela ne apane hips thode uthaaye aur ao pichhe taraf khisaki. Ab lund ka mattha Sheela ki yoni ke munh men lag gaya.

Lekin, Manjula ki chut aur Sheela ki chut men kaafi fark tha. Jab ki bhabhi ki chut men janae men lund ko koi taklif nahin hui thi, Sheela kunvaari hone se lund jaladi se ghusa nahin. Akela mattha yoni patal tak gaya. Mein ne thoda lund bahar nikala aur fir se dala. Si si avaaj karate hue Sheela boli, “Fikar mat karan bhaiya, dal do apana lund.” Mein ne ek inch sarikha lund ko istemal karate hue das baar dhakke lagaye aur Sheela ki chut ko chuada ho ne diya.

Aakhir yoni patal todana hi to tha. Mein ne Sheela ke chutad pakade aur ek jor ka dhakka lagaya. Yoni patal tod ke lund chut men paitha. Sheela ke munh se chikh nikal gayi. Mein thodi der ruka lekin mera lund thumak thuamk karata tha aur jyada mota ho ke chut ko bhi jyada chaudi karata tha. Khud Sheela ne kaha, “Ab dard kam ho gaya hai, bhaiya, ab aaram se chodiye.” Mein ne dhihre se dhakke lagaane shuru kiye.

Udhar aage zuk kar Sheela ne apane stan bhabhi ke munh ke paas rakh diye the. Manjula Sheela ki nipples ko chaat rai thi aur chus rahi thi. Us ka ek haath Sheela ki clitoris se khel raha tha. Jab Sheela ki chut fat fat karane lagi tab mein ne dhakke ki raftaar aur gaherai badha diye. Sheela ne kaha, “Bhaiya, bhabhi ko bhi maja chakhate rahena.” Manjula ki chut dur kahan thi ? Sheela ki chut se nikal ke mein ne manjua ki chut men lund dal diya aur chodane laga. Manjula boli, “Devarji, mein to ek baar zad chuki hun. Sheela bahan ka khyal rakhiyega.” Mein ne lund nikal ke fir se Sheela ki chut men dala aur chodane laga. Aise chaar paanch baari chut badalate badalate meine un dono ko ek saath choda. Aap puchhenge ki mein zat se zar kyun na gaya. Is ka raaz ye hai ki bhabhi ke ghar aane se pahale mein ne ek baar hast maithun kar ke lund ko shant kiya tha.

Adha ghante ki chudai ke baad mein Manjula ki yoni men zara. Darmiyaan Sheela ek bar aur Manjula do bar zari. Dono ne uth kar mera lund saaf kiya. Narm hote hue lund ko haath men pakad ke Sheela ne puchha, “Bhaiya, etaraj na ho to mein .. munh men lun tumare lund ko ?” Muze kya tha ? Mein chaar payi par leta raha aur Sheela ne lund ki topi khisaka ke mattha khula kiya aur jibh se chata. Turant hi lund tan gaya. Munh men lene ke liye Sheela ko apana munh pura kholana pada, fir bhi mushkil se vo lumd ko munh men le payi. Jab lund paitha tab tajjubi se us ki aankhen chaudi ho gayi. Lund ka mattha munh men hi pakade hue us ne haath se lund ko ghisana shura kiya. Mere lund se paani chhut ne laga. Apana sar hila ke Sheela lund ko andar bahar karane lagi, saath saath jibh se tatol ne lagi. Manjula us ke pichhe baith ke ek haath se stan sahalati thi aur dusare haathe se clitoris. Sheela ki excitement kafi badh gayi tab mein ne lund chhudaya aut teji se us ko jamin par leta diya. Us ne apani janghen uthai aur chaudi pakad rakkhi. Khuli hui bhos men mein ne zat se lund dal diya aur teji se us ko chodane laga. Das pandar dhakke men ham dono ek saath zare.

“Bhaiya, munh men lund leneki maja chut men lane jaisi hi hai. Bhabhi, tu bhi try kar lena” Sheela ne kaha.
Mein ne kaha, “Ab mere lund men chodane ki takat nahin hai.”
“Dekhun to, “ kah kae Manjula ne mere narm laude ko munh men liya aur chusane lagi. Thodi der lagi lekin lund khada to ho hi gaya. Pandrah minit ki ek aur chudai ho gayi. Manjula ne aagrah kar ke muze mnh men zaraya.Lund ne jo viry chhoda ye saara vo pi gayi.

Ham tino thake hue the. Kapade pahan ke so gaye.Phir sam ko bhaiya aa gaye aur dusre din hum sabhi pune a gaye.

Behan ne bhai ko choda maze se zabardasti chudai hindi sexy story

Tuesday, July 29, 2014

A true story of brother and sister lets start first introduction. Hi friends, this is kitty n my age is 21y. After this incidence i love incest stories.i would like to introduce my family members.1st is my dady.he’s lawer n now 52years old. 2nd is my mom. She’s domestic engineer n now 49 years old. 3rd is my brother.he’s software engineer n now 25years old.and last is my bhabhi.she’s also domestic engineer n now 23 years old.now i’ll write autobiography in hindi.
Ye ghatna tab ki hai jab mere bhaiya ki shadhi ko ek month ho gaya tha.hamare mom-dad ne humse tirth-esthano par jane ke liye bola tho bhabhi ne jane ke liye bhaiya se pucha tab bhaiya ne kaha ki tum chali jao mere tho office se itni vacations nahi milegi tab bhabhi ne jane ki tayari kar liaur mere college hone ki wajha se maine bhi mana ker diya. Phir evening me wo teeno chale gaye, main ab ghar par akeli thimain bhaiya ke office se aane ka intzaar karne lagi. Aur maine dinner bhi taiyar ker diya tha,bhaiya daily 8pm tak aajaya karte the, par us din bhaiya ka intzaar.
karte 11pm hogaye tab jaker door bell baji maine gate khola to mujhe laga ki bhaiya aaj drink kar ke aaye hai, phir maine bhaiya se kaha ki aap jaldi se fresh ho jayiye, aapka dinner taiyar hai. Bhaiya kuch bhi nahi bole aur apne room.
me chale gaye,aur fresh hone lage, maine phir kaha ki bhaiya dinner thanda ho raha hai, tab bhaiya ne kaha ki mere room me hi le aao. Main jab room me dinner le kar gayi tho bhaiya bathroom me hi the, maine bhaiya se phir kaha bhaiya jaldi aa jao ,mujhe bhi bhook lag rahi hai, bhaiya ne kaha “anju jara meri kamar par shop laga dena” main ye sun ker choki kyoki anju tho bhabhi ka naam hai, maine bhaiya se kaha bhaiya main aapki behan kitty hoon, tho bhaiya ne phir gusse se kahaanju sunayi nahi diya kya, maine socha bhaiya ne aaj kuch jayada hi drink ker li haijo.
Mujhe anju keh ker bula rahe hai,mujhe dar bhi lagaki bhaiya kokahi gussa tez na aajaye main chup bathroom ka gate khol ker waha par hi khari hogayi. Maine dekha ki bhaiya meri orkamar kerke shawar ke niche khade the, bhaiya ne phir kaha aayi nahiaur meri taraf mud gaye tho kaha tu jaldi se meri kamar par shop laga de, maine bhaiya ko peheli baar sirf underwere me dekha tha mere badan ye dekh ker kapne laga, maine jaldi se kapte hatho se shop ko uthaya aur bhaiya ki aur barne lagi, us time maine t-shirt or lower pehne hue tha. Bhaiya ke paas jaker unki kamar.
Par shop lagane lagi tab bhaiya bole ki tere hath kap kyo rahe hai, maine kaha nahi tho. Bhaiya ne kaha aur din tho nahi kapte the aaj kya ho gaya tab phir maine kaha main aapki behan hu maine to aaj tak aapko sirf underwere me pehli baar dekha hai, itne me maine unki kamar par shop laga diya tha aur main jane hi wali thi ki bhaiya ne kaha mere aur body par bhi shop laga de, maine thodi ruki par phir maine unke hatho par aur phir unke aage ki aur badi tho dekha ki unka land ek dum khara hai,
aur wo underwerwe se bahar unki nabhi tak aa chuka tha, maine uski taraf dhayan na dete hue, unki cheast par shop lagane lagi phir unke stomuch parlagane lagi tab ek- do bar mera hath unke land se touch ho gaya tha, maine jayada dhayan nahi diya, phir maine unke thing se niche shop lagaya, phir bhaiya bole ki anju aaj tune underwere me shop nahi lagaya,jaise bhaiya ne mere man ki baat sun li ho, maine kaha abhi laga deti hu bhaiya ,phir maine apne ghutno par khade ho ker unke undrewere me hath le jake shop lagane lagi aur jaise hi mera hath unke land se touch hua maine turant land ko paker liya aur ussi par shop lagane lagi.
Bhaiya bole ki iski khal ko piche karke shop lagao na, maine waisa hi kiya, par bhaiya ka land bahut lamba aur mota tha, lagbhag uski lambai 9-10 inch ke bich hogi, bhaiya bole eshe hath se malish de aage piche kar ke, maine waisa hi kiya, bhaiya ne tab hi shawar chala diya unka sab shop saaf ho gaya aur main bhibheeg gayi ab unka land aur saaf nazar aa raha tha aur mere chehre ke theek samne tha, tab bhaiya ne kaha aur tezi ke sath malish kar maine aur tazi se malish karne lagi, bhaiya ke mu se kuch ajeeb tarah ki aawaj aane lagi aur unhone mere sar ke piche apne hath rakh diye, maine malish ki raftaar aur taz ker di, bhaiya ne mere sar ko aapne land ki or kerne lage , maine bhi apna chehra unke land ke bilkul pass le gayi, bhaiya ne tab land ko mere hothon par touch kar diya, maine piche hatne ki kosis ki per bhaiya bole.
Anju mu khol le land ab mu me le ker chus, maine thora socha ki bhabhi bi mu me leti hogi ye soch ker maine bhi land ka supara mu me le liya, aur halka sa chusa tho land se lar si nikli uska taste phika sa tha. Maine phir bhi mu me liye rahi aur ek hath se malish karti rahi, thori der ke baad bhaiya ke land se kuch nikla aur bhaiya ne land jitna mere mu me ja sakta tha utna under ker diya aur meri saas tak band ho gayi thi, aur jab bhaiya ne land ko mere mu se nikala tab mere mu me land ka nikla hua ras tha, bhaiya bole anju jaan eshe pi jao maine usko pura nigal liya bada ajeeb sa taste tha. Maine land ka supare ki aur dekha uss per kuch safed sa nikal raha tha, bhaiya bole eshe saaf ker de maine phir hath se usse saaf kar diya, phir land ko bhaiya ne.
Mere mu de diya aur chuswaya jab tak wo saaf nahi hua. Meri bhi itni der me halat bahut buri ho chuki thi maine bhi land ko chor kar khadi ho gayi ,tab hi bhaiya ne meri t-shirt ko utar diya, main saram se bhaiya ke sine se lag gayi, bhaiya mere piche hath le jaker bra ko bhi khol diya jisse meri 34 size ke boob free ho gaye, phir bhaiya ne mera lower aur panty ko bhi utar diya, aur mujhe leker badroom me aa gaye aur mere hothon per kiss kerne lage aur mere boob dobane lage thori der baad maine dekha unka land khada tha aur mere thing ke theek bich me meri chut ko touch ker raha tha, tab maine apni legs ko phila liya aur bhaiya ne land ko meri chut ke chad per rakha aur ek dhakha diya per land chut se phisal ker niche ko ho gaya, bhaiya ne phir chut per land ko set kiya dhakha mara land phir phisal gaya mujhe es baar ruka nahi gaya.
Maine bhaiya se kaha ki aapne kuch jayada hi drink ker li hai tum se nahi hoga, main ye kehker bhaiya ke niche se nikel gayi, bhaiya se sidha letne ko bola phir maine land ko chusa, phir maine dinner ki makkhan wali katori le aayi. Maine kuch makkhan meri chut per lagaya aur kuch land per aachi tarah lagaya, aur main josh me aaker land per bhaith gayi es baar land mere hyman jilli ko bedhta hua aadha meri chut me ghus gaya ,mera es waqt dard se bura hal tha, main land nikal ne ki kosis kerti to bi derd ho raha tha aur ander kerne per tho ho hi raha tha, tab main kuch der aise hi land per bithi rahi aur jab mujhe kuch chain mila tab maine hilna start kiya par bhaiya bole abhi to adha land aur lena hai.
Tab maine kaha main aur nahi le sakti mare dard ke jaan nikli ja rahi hai. Bhaiya bole mujhe bilkul maza nahi aata aadhe land se ya to pura lo ya main uper aata hu, main kaha theek hai uper aa jao per mera khayal rakhna nahi to main mer jaugi. Bhaiya mere uper aa gaye aur mere hotho per kiss ki aur puri speed se dhaka mara meri sans uper ki uper hi ruk gayi, aur meri cheek nikal gayi par bhaiya thora rukne ke baad mujhe dhake marne lage, mujhe pehle dard hota raha phir baad me mujhe bahut maja aane laga aur mera pani nikal gaya per bhaiya lgataar mujhe dhake marte ja rahe the mujhe bhi maja aaraha tha kuch time baad mera dusri baar pani nikal gaya per bhaiya mujhe chodte rahe rukne ka naam hi nahi le rahe the aur ab mujhe toilet bhi bahut tez aane laga mere se ruka bhi nahi ja raha tha. Maine bhaiya se kaha bhaiya mujhe toilet aa raha hai aur mujhe maza bhi nahi aa raha mujhe jaane do mere se nahi ruka jayega bhaiya bole 2min aur ruk ja bas mera bhi hone wala hai.
Main boli mera toilet yaha hi nikal jayega per bhaiya ne speed aur tez ker di, aur mere se berdast nahi hua mera toilet nikal gaya , tab hi bhaiya ne mere ander hi apna virya nikal diya ,meri legs kaap rahi thi. Bhaiya bole chal kuch nahi hua aur land nikal ker mere mu me de diya ,land se virya or toilet ki smell aa rhi thi,per maine chusa. Phir bhaiya ne mujhe uthaya aur dinner wali table ko bed ke pass kiya aur ek chamach li. Phir bhaiya ne meri chut me se nikal rahe juice ko chamach me liya aur mujhe pila diya.
Bhaiya ne es baar chamach ko meri chut ke ander ghusa ker juice liya aur phir mere mu me dal diya phir humne dinner kiya or so gaye, next day bhaiya uthe or mujhe naked dekha to mujhe uthaya, aur kaha tu yaha eshe naked kyo so rahi hai or datne lage, 

ट्रेन में दोस्ती - Friendship in Train

Monday, July 21, 2014

यह कोई दो महीने पहले की बात है, मैं ट्रेन से सफर करते हुए अपने गाँव जा रहा था। ट्रेन में काफी भीड़ थी इसलिए मुझे सीट नहीं मिली। मैं जाकर ट्रेन के दरवाजे पर खड़ा हो गया। मैं खड़ा हुआ बोर हो रहा था, तभी एक लड़की और उसकी दादी भी उसी डिब्बे में चढ़ गई। दादी को तो एक अकंल ने सीट दे दी पर वो लड़की मेरे पीछे आकर खड़ी हो गई। इसी दौरान गाड़ी चल पड़ी। गाड़ी तेज चल रही थी जिससे यात्री इधर उधर हिल रहे थे। मेरा हाथ बार बार उसके पेट से टकरा रहा था और वो मुझे गर्म लग रही थी। अब तो मेरे मन ने हिलोरें लेनी शुरू कर दी, मैंने जानबूझ कर अपना हाथ उसके पेट पर फेरना शुरू कर दिया। उसे भी लगने लगा कि मैं यह सब जानबूझ कर कर रहा हूँ। उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे धीरे से मना कर दिया। भीड़ की वजह से किसी का ध्यान हम पर नहीं था।
अब मैं घूम कर उसकी ओर मुँह करके खड़ा हो गया और उससे उसका नाम पूछा तो उसने बिना किसी ना-नुकर के अपना नाम बता दिया। उसका नाम विनीता था। मैंने उससे उसके बारे में सब कुछ पूछ लिया। वो फरीदाबाद की रहने वाली थी। मैंने उससे उसका पता और फोन नंबर लिया, मैंने भी अपना नंबर उसे दे दिया। इसके बाद मेरा स्टेशन आ गया और मैं उतर के अपने गाँव चला गया।
15 दिन गुजर गये, ना तो उसने काल किया ना मैंने ! लेकिन 15 दिन बाद उसका एस एम एस आया कि वो एक जरूरी काम से गाजियाबाद आ रही है। उसने मुझे होटल का नाम बता दिया। उस दिन मैं शाम 7 बजे होटल पहुँच गया। मैंने उसके बताये कमरे का दरवाजा खोला, मैंने देखा कि विनीता बेड पर उल्टी लेटी थी। मैंने दरवाजा बंद कर दिया, विनीता ने एक हल्की नाईटी पहनी थी जिससे उसका सारा शरीर साफ दिख रहा था।
जब मैंने विनीता को उस हल्की नाईटी में देखा तो मेरा छ: इंच का लंड सलामी देने लगा। मैंने खुद को कन्ट्रोल किया और धीरे से मैंने उसे आवाज लगाई। मेरी आवाज सुनकर वो बड़ी तेजी से उठी और मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मुझे बेहताशा चूमने लगी। मैंने भी उसका पूरा साथ दिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। मेरे हाथ उसके पेट पर घूम रहे थे। मैं उसे बिस्तर पर ले गया वो चुदने के लिए बेकरार थी।
मैंने उसकी नाईटी उतार दी। अब वो सिर्फ पैन्टी और ब्रा में थी। मैंने उसका फिगर निहारा क्या गजब का फिगर था ! उसकी चुच्ची बिल्कुल कैटरीना की तरह थी। मैंने उसकी चुच्ची को दबा दिया। अब उसने मुझे कपड़े निकालने को कहा तो मैंने कहा- तुम ही निकाल दो !
उसने मेरे कपड़े उतार दिए। अब मैं भी सिर्फ कच्छे में था। मेरा लंड बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। मैंने अब अपना हाथ विनीता की पैंटी में डाल दिया और उसकी चूत मसलने लगा। उसकी चूत पे एक भी बाल नहीं था। उसकी चूत बिल्कुल गीली हो चुकी थी और वो जोर जोर से सिसकियाँ ले रही थी- आ आह अअअ उउउ आ अअ ! मार डाल ! फाड़ दे ! चोद दे ! सि..
मैं भी उसकी चूत को जोर जोर से रगड़ रहा था। वो मेरे हाथ पे ही झड़ गई।
मैंने उसे लेटने को कहा, उसकी टाँगें चौड़ी की और अपना लंड उसकी चूत के छेद पर रखा और दो धक्को में ही लंड अंदर चला गया। पूरा कमरा उसकी चुदाई की चीखों से भर गया। मैंने विनीता की चुच्चियों को मुँह में दबा रखा था। लगभग बीस मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों झड़ गये। उस रात हमने चार बार चुदाई की।
सुबह वो अपने रास्ते चली गई और मैं अपने !
पर हम आज भी फोन पर चूत-चुदाई करते हैं!

Mamu aur Bhai Se Chudai - Hindi sex story

Friday, July 18, 2014

Abhee do mahine pah'le hee main 20 saal kee ho gayee hoon. Mere se 12 saal bara mera ek bhai hai jis'kee chaar saal pah'le shaadee ho gayee hai. Hamaare ghar men bahut hee khush numa maahol hai. Picnics men jaana, achchhe restran men jaana, kah'ne ka mat'lab jind'gee ka har lutf ham khul ke uthaate hain. Aaj phir picnic ka program tha. Ham'ne ek alishaan farm house book kar'va liya. Picnic men mere sage maama aur doos're karibee ristedaar bhee shirqat kar rahe the.

Main apnee doosree riste kee bahanon ke saath farm house ke swimming pool main tairaakee kar rahee thee. Maama ham sab ko tairaakee sikha rahe the. Ham lar'kiyon ne shalwar qameezain pahanee huwee thee. Maama ham sab ko baaree baaree tairaakee sikha rahe the. Choonki farm house maama ne book karaya huwa tha is wajah se hamaree family ke elawa koi aur naheen tha. Shaam kaa sama aur halke halke baadal kee wajah se mosam (season) bahut hee khush gawar tha. Mummy apnee bahnon aur deegar relative ke saath aur papa apne ralative ke saath tairaakee kar rahe the. Kuchh fasale par bhai jaan bhabee ke saath panee main khel rahe the.

Panee kafi thanda aur gehara tha aur blue color ke bare swimming pool kee wajah se panee bhee neele rang ka bahut hee dilkash lag raha tha. Jahan ham log panee main khel rahe the wahan panee hamaree kamar(waist) ke ooper tha. Maama ne ab mujhe tairaakee ke baare main bataya aur mairee madad kar ne ke liye maire peroo ke neeche se mujhe utha kar haath aur pair kee madad se tairaakee kara rahe the. Maama kee shadee nahee huwee thee aur woh maire nana nanee ke saath hee defence main rah'te the. Sab log apnee biwiyon ke saath khel rahe the jab ki woh ham logon ke saath tairaakee main masroof the. Maama khaas tor par hamse bahut hee mohabbat kar te the. Chonki mairee mummy unkee eklautee bahan thee.

Maama ne maire peroo ke neeche haath rakha huwa tha aur main tairaakee ke liye haath pair hila rahee thee. Maama ne achanak haath hata liya aur main disbalance hoker girne lagee to maine maama ko pakarana chaha aur gal'tee se maire haath maama ke lund par lag gaye. Main ghabra gayee laiken koi dhyaan naheeh diya. Maama ne phir mujhe tairaakee karne ko kaha aur main phir se tairaakee karane lagee. Maama ne ab jo haath rakha to woh aik haath maire mummon ke neeche aur doosra mairee choot ke neeche tha. Main abhee 17 saal kee thee aur main na to mummon par kuchh pahen'tee thee aur na hee mujhe underwear kee aadat thee. Maama ke haath maire kapre geele hone kee wajah se aisse lag rahe the ki maire mumme nange hain.

Yeh pah'lee baar tha ki kissee ka haath ne maire mummon aur choot ko sparsh kiya tha. Mujhe maama ka haath bahut achchha laga. Main tairaakee kee koshish kar rahee thee aur maama ka haath waheen laga huwa tha. Maama ne kaha ki woh haath hata rahe hain aur unhon ne haath hataaya ki main phir asthir hogayee aur jyonhee maine unko pakar'na chaaha, maira haath phir maama ke lund par laga. Isbar maine khud hee haath waheen lagaya tha. Maine haath se mehsoos kiya ki maama ka lund ab kuchh tana huwa tha. Main maama ke samne kharee thee aur main ne paar'darshee (transparent) panee se daikha ki maama ka lund khara huwa tha. It'ne main mairee aik cousin ne kaha ki ab main seekhoon gee lekin maine mana kar diya aur kaha ki main kuchh dair aur seekhongee.

Main phir tairaakee karne lagee ab main jaan boojh kar baar baar asthir hone lagee aur maama ka lund ab khub saaf nazar aa raha tha ki woh bilkul seedha khara huwa tha. Main aik baar tairaakee kar'te huwe doobne lagee. Maama ne mujhe tham liya aur main kharee hokar maama ke seene se lag gayee. Maama ka lund maire peroo se takra raha tha. Is manzer ne mujhe bahut hee sexy kar diya. Maine aik baar phir tairaakee kee koshish kee aur ab maama ne mujhe panee par seedha karke khud maire tangon ko phela kar maire peechhe aa gaye. Ab unhon ne maire peechhe se dono tangon ke beech hokar maire peroo ko pakar liya aur kaha,pehle hathon kee practice karo phir pairon se karna. Main maama ko dono tangon ke beech pakar hathon se practice karane lagee aur maama ka lund mairee choot ke qareeb mehsoos ho raha tha jo ki bahut hee lajawab lag raha tha. Main hathon se practice kar rahee thee aur dar asal maama ke lund ko choot ke qareeb paakar khush ho rahee thee ya sex main garam ho rahee thee.

Maama ka lund hil'ta huwa mehsoos ho raha tha aur usne maire thande panee main doobe huwe badan main aag laga raha tha. Yeh ehsas mujhe pah'lee baar huwa tha aur bahut hee khus gawar tha.. Main tairaakee to kya seekh'tee kissee aur aag main jalna seekh rahee thee. Main thak gayee to main kharee ho gayee. Maama ka haath ab bhee maire peroo par tha aur khare hote hee mairee chuttar ke oopar maama ka lund mehsoos huwa. Main palat kar seedhee ho gayee aur maine maama kee ankhon main aik naayee chamak daikhee aur khud maire jism ke under bhee aik naya paigham tha. Shaam dhal chukee thee aur main aik naya khuwahis mehsoos kar rahee thee. Maama ne poochha,

Aur practice karo gee lekin unka halaq khush ho chuka tha aur baree mushkil se unkee awaz nikal rahee thee. Abhee main jawab hee daine walee thee ki papa aur bhaiya kee awaz aayee ki chalo ab raat ho rahee he. Main awaz sun kar na chaahte huwe panee se bahar nikal aayee lekin maama ne kaha,

Main abhee thahar kar aa raha hoon. Main samajah gayee ki woh khare lund ke saath kaisse bahar aa sakte hain. Hamlong farm house ke hall main aa gaye aur thoree hee dair ke baad maama bhee aa gaye. Woh kuchh chup chup the.

Hall main bhaiya aur maama ke saath saath sab hee ne half paint pahanee huwee thee jabki ham lar'kiyon aur ladies ne shalwar kameez pahanee huwee thee. Mummy aur bhabee waghira khaaana laga rahee thee. Main baar baar maama ko daikh rahee thee aur jab unkee taraf daikhtee to unko apnee hee taraf daikhtee huwee paatee. Maire under aag lagee huwee thee aur maama ke lund aur hanthon kee tapish ab bhee mehsoos ho rahee thee.

Sab khaana kha rahe the laikin main baidelee se kha rahee thee. Aik aag jo maire badan main lagee huwee thee kam naheen ho rahee thee. Maama bhee doosree taraf chup chup the aur woh bhee wahee soch rahe honge jo main soch rahee thee. Maama aik lambe qad aur sehat mand jism ke malik the. Woh aur bhaiya dono hee daily gym jaaya kar'te the aur issee wajah se dono main bahut dostee thee. Maire cousins mujh se baaten kar rahee thee lekin mujhe koee dilchaspee nahee ho rahee thee. Main apne baare main gaur kar rahee thee ki main aik dublee pathlee parantu lambee thee. Mairee ankhain brown aur skin color fair tha jabke baal bahut hee silky aur bade the. Main apne baare main soch hee rahee thee ki khana khatam huwa aur ab hamlog tea se lutf utha rahe the aur sab hee gap shap kar rahe the. Raat ke ab 11 ho gaye the aur aakhir papa ne kaha,

Ab sab so jain keyon ki morning main break fast kar ke sab ko wapis jaana hai. Hall main carpet par bistar set hone lage aur main hall kee deewar ke pass khir'kee ke neeche apne bistar par late gayee. Tamam gents ke bistar hall main aik saath set huwe aur unke pairon kee taraf kuchh fasle ke baad ladies ke bistar set huwe. Maine daikha ki maama mairee khir'kee ke baad aik khir'kee chor kar doosri khir'kee ke pass bed par the aur unke barabar papa ka bed tha... Ham sab ke laitne ke baad hall kee light off kar dee gayee. Mairee window se chandnee raat chhan chhan kar maire bed par gir rahee thee aur khir'kee ke neeche lagee huwee raat kee rani kee khushboo ne mujhe mast kar diya tha.

Main laite laite maama ke baare main soch rahee thee ki jo kuchh aaj swimming pool main huwa tha who kithna hasseen tha. Mujhe ab bhee khayaalon main maama ka lund choot ke qareeb aur haath mummon par mehsoos ho raha tha. Main ne apne haath shirt ke under se apne mummon par lagaaye to mahasoos huwa ki maire mumme ab bhee khushee main khub tane huwe the.. Maine doosre haath ko shalwar ke under daala aur choot ko chhuwa tho maza aa raha tha. Main ne sone kee koshis kee lekin mujh se to laita bhee naheen jaa raha tha, bus kurwat badal rahee thee. Main to bed par foran sone kee aadee thee lekin aaj to neend naraz ho gayee thee.

Hall main kharraton kee aawazain aa rahee thee aur thandee chandnee maire ooper thee. Main maama ke baare main soch rahee thee ki woh sote huwe maire baare main khuwab zuroor daikh rahe honge. Mairee halat aaj ke waaq'ye ke baare main soch kar bardasht se bahar ho rahee thee. Kambakht neend bhee nahee aa rahee thee.. Maine apne ooper se chadar (sheet) hataayee aur apnee shirt oopar kar ke apne jism ko nanga kiya. Halkee halkee chandnee main kuchh nazar to aa raha tha lekin saaf naheen tha. Maine shirt aur salvaar dono utaar dee aur ab main nangee ho gayee. Main apne hathon se apne jism ko sehlane lagee aur mujhe maza aane laga. Apnee unglion se choot ko chhuwa to aur bhee maza aane laga. Maire under se bhap(steam) nikal rahee thee aur lag raha tha ki maira jism aag se peghal(melt) na jaay.chain naheen aa raha tha aur samajh main naheen aa raha tha ki kiya karoon bus dil chah raha tha ki maama maire pass aa jain aur maire saath lait jaayen.yeh soch'te hee maire zahen main aik kheyal bijlee kee tarah aaya ki keyon na main khud hee maama ke pass chalee jaoon. Phir socha ki kaheen garbar na ho jaay aur maama kuchh aur hee na kardain. Jism tha ke zalim sukoon naheen paa raha tha. Main apne hathon se apnee choot aur boob ko sehla rahee thee lekin jyon jyon main sehlathee aag aur bharak uth tee.

Main aik dam nangee hee kharee ho gayee aur hall main daikha ki har taraf andhera hee chhaaya huwa he. Maama walee khir'kee par shaayad parda tha jo ki bahut hee mushkil se nazar aa raha tha. Maine socha ki aaj yah phir kabhee naheen. Yeh sochna tha ki sara khof khatam aur main aik nidar aur baikhof larkee kee tarah ho gayee. Main ahesta ahesta maama kee taraf badh rahee thee. Aik window chhoree aur doosree khir'kee tak pohanch gayee. Isee khir'kee ke kenare maama the.

Main nangee hee thee aur maama ke barabar lait gayee. Maama ne chadar oree huwee thee. Maama so rahe the aur unkee sanson kee awazain aa rahee thee. Mujhe dukh huwa ki maire andar aag laga kar khud kis maze se so rahe hain. Maine ahistah se unkee chadar uthaayee aur unke barabar hee lait gayee. Maama ke jism kee garamee maire jism par mehsoos ho rahee thee. Maama gahree neend main the aur seedhe laite huwe the.

Maine apna haath maama kee half paint par se lund par rakha to maama kee tarah woh bhee soya huwa tha. Main karwat hokar unke aur qareeb ho gayee aur apne hathon se unke seene ko haath lagaya aur unglion se sehlane lagee lekin kiya neend thee ki un par koi asar naheen huwa. Maine apne haath badhaaye aur unkee half paint main, jo ki bilkul loose thee, apne haath daal kar lund tak pahoonch gayee. Unka lund aissa lag raha tha ki jaisse koee thanda goshth ho. Main ne apnee ungleyon se unke lund ko sehlana shuru kar diya.

Chand hee lamhon main unka lund kuchh harkat main aa gaye. Mairee unglian unke lund ko jaga rahee thee aur unka lund bhee raftah raftah jag raha tha. Tabhee achanak maama ne karwat badlee aur unka chehra mairee taraf ho gaya. Maine haath nikala naheen aur sehlaatee hee rahee. Maire hont maama ke hont ke qareeb ho gaye aur maire mumme unkee chhaatee par lag gaye. Maine unke honton se apne hont chipka liye aur unglion se unka lund sehlaatee rahee. Unka lund kafee bada ho chukka tha magar ab bhee woh laita hee huwa tha. Maine maama ke honton ko apne honton main le liya.unke honton ko choosa to aissa laga ki maire honton main koi methee aur garam see cheez aa gayee. Honton ko chooma to maira jal'ta huwa jism aur dahak gaya.

Maama ka lund taizee se aur bara ho raha tha aur ab khara hone laga tha. Maine apne hathon se lund ko pakar liya. Maire hathon ne pah'lee baar kissee lund ko chhuwa tha. Lund ithna mota tha ki mairee hathailee main naheen aa raha tha aur lamba kithna tha uska andaza hee mushkil tha. Lund mairee hathailee main aissa machal raha tha ki hathon se bahar nikalna chahtha ho. Maama ke lund kee tapish se mairee hathailee geelee ho rahee thee aur lund kee veins taizee se hil rahee thee. Kash main maama ka lund daikh sak'tee.

Main honton ko choos rahee thee ki achanak maama kee sone walee sanasain ruk gayeen. Woh yaqeenan jaag chuke the lekin main dar naheen rahee thee aur bilkul normal thee. Maama ne apne hathon se mujhe hatana chaha to unko mehsoos huwa ki main to nangee hoon. Unka haath mairee kamar par ruk gaya. Ab unke hathon ne maire jism ko neeche kee taraf tatola to maira pura baden hee nanga mila. Unka lund aur sakht ho gaya aur unhon ne kuchh dair tak rukne ke baad mujhe apne hathon se seene par chip'ka liya aur khud hee pyaar kar''ne lage.

Maira kaam khatam howa aur ab main maama kee marzee par thee. Maama mujhe pyaar kar rahe the aur apne mazbooth hathon se maire 15 saal ke silky, baidaag aur garam jism ko masal rahe the. Main khush thee aur maama kee aaghosh main bahut hee mahfooz mehsoos kar rahee thee. Maama ke barabar papa kee kharranton kee awazain musalsal aa rahee thee. Maine haath badha kar maama ko galle laga liya aur kuchh zor se unse chimat gayee. Maama ne apnee half pain utaar dee aur shirt to thee hee naheen. Maama ka lund mairee choot par tha aur mairee thighs ke andar jaane kee koshis kar raha tha. Maine apnee ooper walee jaangh ko zara ooper kiya aur maama ka lund andar chala gaya. Lund ko andar paaya to maine apnee jaangh wapis rakh dee aur maama ka pura lohe kee tarah sakht lund mairee jaangh ko cross kartha huwa bahar jhank raha tha.

Maama maire honton, gaalon aur ankhon ko choom rahe the aur main bhee unko choom rahee thee jabki unka lund mairee choot ke dahane ko masal raha tha. Maire peroo main aik aag ka gola tha jo andar hee andar ghoom raha tha. Main maama ko choomthe huwe pagal ho gayee aur unke moonh main apnee nazuk zuban dal dee. Maama ne mujhe apnee banhoon main jakra huwa tha aur main aik kanwaree larkee maama ko apne seene se chip'ka kar unkee zuban ko kaat rahee thee.maama ne mujhe seedha lita diya aur khud mairee tangon ke beech aa gaye. Pure hall main khamoshee thee aur sab hee gehree neend so rahe the. Maama ne apna lund mairee choot par rakha. Mairee choot to waise hee it'nee dair main geelee ho chukee thee. Unhone lund ko mairee choot par rakh kar ander dalane kee koshis kee. Unka tapta (hot) huwa lund mairee choot par rakha to choot par naayee lazzat see mehsoos huwee. Unka lund jyonhee mairee choot ke darwaze ko khol kar zara sa hee andar dakhil huwa to mairee choot main dard shuru ho gaya.

Aissa lag raha tha ki koi pahaar mairee choot ke andar aa raha he.choot main maama ka lund phans gaya aur jyonhee kuchh aur andar aaya mairee to cheekh nikal ne lagee aur dard bardasht naheen ho raha tha. Maine chadar apne moonh main thoons lee jabki maama ko kuchh pata hee naheen tha ki mujh par kaisee qayaamat toot rahee he. Aik lamhe ko dil chaha ki wahan se bhag jaoon laikin phir socha ki aissa moqa kabhee nahee aayega. Socha, 'aaj ya phir kabhee naheen'. Maama ka lund aur andar aaya aur ab mairee bardasht ne jawab de diya aur chadar moonh main thoonsne ke baw'jood aik halkee see cheekh nikal gayee. Maama ne cheekh sunee to aik dam maire ooper aa gaye.

Unhon ne maire honton ko choom'na chaha to wahan chadar thee. Woh samajh gaye ki unke lund ne kiya kar diya he. Unhon ne mairee ankhon par haath lagaya to wahan ansoo beh rahe the. Maama ne apna moonh mairee ankhon par rakha aur ansoo ko peene lage. Unka lund ab bhee waheen tha. Maama maire ooper laite huwe the aur main unke bojh(weight) ke neeche dabee huwee thee lekin uskee takleef lund se paida hone walee choot kee takleef ke saam'ne kuchh bhee naheen thee.

Maama mujhe pyaar kar'ne lage aur ahistah ahista lund ko andar daalne lage. Maira andaza tha ki aik inch fee minute kee raftar se lund andar jaa raha tha. Maine maama ko dard kee shidat se apnee banhon main lipta liya tha. Mairee choot main mirchain see lag rahee thee aur lag raha tha ki kanwaree choot lund kee wajah se tukre tukre(pieces) ho jaaye gee. Maama ke honton ne maire honton ko choos'te huwe mairee takleef deh cheekhon ko band kar diya tha.

Lund andar jaa raha tha jaise koee saamp(snack) apne bill main dakhil ho raha ho. Aik muqam par aa ker unka lund ruk gaya aur main mehsoos kar rahee thee ki aik pardah he jisne unke lund ko roka huwa he. Yeh main jaan'tee thee ki kanwaree lar'kiyon main aksar aik pardah hotha he. Maama ka lund ruka huwa tha aur na maloon kithna andar gaya tha aur kithna bahar reh kar andar jaane ke liye baitab tha. Maama ne mairee garden ke neeche haath dalkar mujhe aur zor se apne se chimta liya aur maire dono honton ko apne moonh main le liya. Maama isee tarah maire ooper se zara ooper uthe. Unka peroo ooper huwa jis'se unka lund thora saa bahar nikla aur phir unhon ne mairee garden ko khub zor se bheencha aur phir aik dam unhon ne apne lund ko khofnak jhatka diya aur mairee choot ke parde ko pash pash (pieces) kar diya.

Mairee ankhain ubal paree, mairee cheekh nikal gayee, mairee choot main jaise bomb phat gaya. Pura hall roshan lag raha tha. Mairee ankhon main taare nachne lage. Maira jism kaamp'ne laga aur maama ka lund puree tarah andar ja chukka tha. Main ro rahee thee aur main apne hathon se maama ko dhakail rahee thee. Lekin kahan main dublee see sirf 17 saal kee larkee aur kahan laheem shahem maama. Mujhe pain naheen balki maira pura jism tukre tukre ho chukka tha.

Maine maama ko apnee banhoon se jakar liya aur apne honton ko maama ke honton se aazad kar ke dard kee shidat se maama ke right side ke shoulder ko jo ki maire hoton ke qareeb tha par apne daant (teeth) gaar (penitrate) diya. Mujh main jit'nee taqat thee ut'nee shidat se maama ke kandhe par apne danton ko gaar diya. Main unke kandhe ko is zor se kaat rahee thee ki mujhe maama ke kandhe se namkeen khoon (blood ) ka swaad mehsoos ho raha tha. Maama kee bhee dard ke mare siskeyan nikal rahee thee.

Isee doran mujha apnee choot main se koee garam garam padaarath bahata huwa mehsoos huwa. Yaqeenan yeh maire kanwaree choot se behtah huwa khoon tha joki rah rah ke bah raha tha. Maama maire mummon ko choos rahe the aur main unke kandhe ko hee kaat rahee thee. Yah kahaanee aap yahoo groups; deshiromance men padh rahe hain. Ab maire pain main raftah raftah kamee ho rahee thee. Maine maama ke honton par apne hont rakh diye aur unko choosne lagee. Dard kee kamee ke baad mairee choot main saja huwa maama ka lund achchha lag raha tha.

Maama mujhe pyaar karta huwa paaya to woh shaayad kuchh muthmaen (calm) ho gaye aur jawab main mujhe bhee pyaar kar'ne lage. Main lund ke baare main soch rahee thee ki kithana bada hoga kash main daikh sak'tee. Ab maama ne lund ko ahistah ahistah bahar nikal kar andar dalna shuru kar diya. Maama ka khofnak lund ab dard kee manzil tay kar chukka tha aur maire jism main halkee halkee lazzat aur maza baidar ho raha tha. Abhee main is lazzat ko mehsoos hee kar rahee thee ki barabar laite huwe papa ka haath maire seene par aa gaya.

Maire papa ka haath unkee baitee ke seene par tha main muskura dee lekin woh kharratain lai rahe the. Maine unka haath seene par se hatha diya aur maama ke lund kee taraf mutawajah ho gayee. Maama ka lund andar bahar ho raha tha aur goya ki meetha meetha dard mehsoos ho raha tha lekin maza zeyadah aa raha tha. Main maama ko pyaar kar rahee thee aur woh maire mummon aur honton ko chat rahe the. Maine maama ko apnee banhon (arms) se qareeb kiya huwa tha. Maama ke lund main ab taizee aa rahee thee aur main bhee apnee choot se unke lund ko andar bahar kar rahee thee. Charo taraf khamoshee thee aur raat kee rani ne pure hall ko mehka diya tha. Maine maama ke galon ko pyaar kiya aur phir unke moonh main apnee zuban dal dee. Maama kee zuban ne mairee zuban ko choosna shuru kar diya aur lund ne mairee choot main sex kee chingaree jala rakhee thee.maama kee raftar aur taiz ho gayee thee aur raftah raftah taizee main izafah ho raha tha. Maine apnee dono tangon ko maama kee kamar ke gird phela diya tha aur khub khush thee. Ab ham dono hee taiz ho gaye the. Dard to tha lekin bahut hee kam. Maama ne aik baar phir mujhe bheench liya aur lund kee raftar khub taiz ho gayee thee. Mairee choot bhee lund ko paakar paagal ho chukee thee. Maama ke lund main kuchh dair tak taizee rahee aur ham dono ke kiss bhee gahare aur lambe hote gaye. Maama ke lund se garam garam gaadha padaarath nikla aur usne mairee choot ke andar tamam hisson ko bhar diya. Mairee choot is nayee aur sexy tabdeelee ko mehsoos kar ke khud bhee nidhaal ho gayee aur andar se aik naya sailab bahne laga. Maira pura wujood sukoon aur rahat main doob gaya. Maine maama kee tarah is lamhe aik doosre ko khub zor zor se kiss kiya.

Maama ka lund meree choot ke andar hee apne andar se aik aik qatray ko baahar nikal raha tha aur mairee choot ka juice bhee nikal raha tha. Maama maire ooper laite huwe pyaar kar rahe the. Maine ooper laite maama kee kamar par 3 time sss likha aur woh thoree dair ke liya maire likhne par kuchh ruke aur phir pyaar karne lage. Maama ka lund ab wapis aane laga tha aur thoree dair baad jab bahar nikla to choot main band ham dono ka kharij shudah madah nikal ne laga. Maama maire pehloo main aa gaye aur mujhe galle laga liya. Maine maama ke muqable main unko khub kiss kiya aur kafi dair tak unke saath chimtee rahee. Maine aik baar phir maama ke seene par apnee nazuk unglios se 3 baar sss likha yani ki mera poora naam sama salman surti.

Maine daikha ki door kaheen sooraj nikal raha he. Maine maama ke honton par us raat ka akhree kiss kiya aur nangee hee apne bed par chalee gayee. Maama ko shaayad yah maloon tha ki naheen ki main kon hoon. Unhone hall main mojood kiss larkee kee jawanee ko apne lund se qubool kiya he. Main apne bistar par nangee laitee huwee thee aur khush gawar yadain mairee rooh main mustaqil jagah bana chukee thee. Mairee choot ke andar aur bahar ab bhee halka halka dard magar suroor main dooba huwa mahsoos ho raha tha. Maine chadar oree aur kuchh dair baad neend kee aghosh main nangee hee chalee gayee.

Hal main logon ke shor par uthee to maloom huwa ki log jaagna shuru ho gaye the. Maine chadar ke andar hee apne kapre pahane aur bed par baith gayee. Maama papa aur deegar logon ke saath break fast kee taiyaaree kar rahe the jabki bhai sab logon ko jaga rahe the. Maama samait kafee logon ne apna saman pack kar liya tha. Choonki nashteh ke baad sab ka wapis jaane ka program tha. Main wash room se farigh hokar maama ke pass baith gayee. Maama ne poochha,

Raat kaisee guzree, neend achchhee se aayee ya naheen. Maine kaha,

Zabardast, aisee mubaarak raat sab ko mile. Yeh sun kar sab hee muskurane lage. Bhai ne poocha,

Sama ! Tairaakee achchhee se seekh'lee na. Maine jawab diya,

Bahut kuchh seekh liya. Ham log ghar pahoonch gaye aur maama hamlogon ko chor kar apne ghar chale gaye. Unhain jaate huwe daikh kar maine muskura kar shukraya ada kiya aur woh muskrathe huwe challe gaye.

Main dil main soch rahee thee ki ab aglee baar maama ee kis tarah maja loongee aur ab to koi mushkil bhee nahee. Main apne kamre main chalee gayee aur shower laiker so gayee. Saree raat to jagee thee. Main ne to farm house main apnee zindagee kee sab se sohaanee raat guzaree thee. Shaam ko so kar uthee aur bhabee ke kamre main chalee gayee. Woh bhee abhee so kar uthee thee. Shaayad unhon ne bhee bhai ke saath farm house ka lutf uthaaya tha. Bhaiya shower le rahe the. Bhabee ne mujh se kaha,

Sama ! Tum picknic ke baad kit'nee khush or fresh nazar aa rahee ho. Main sirf muskuradee. Bhabee ne farm house wala beg nikala ki saman set karlain aur it'ne main bhaiya hasbe aadat baniyaan aur short pahane huwe haath main tolia (towel) liye huwe aa gaye. Unhon ne mujhe daikh kar poochha,

Picnic kaisee rahee main ne kaha,

Bhaiya bahut maza aaya. Main bhabee kaa haath bata rahee thee. It'ne main bhabee ne bhai kee taraf cheekh kar kaha,

Yeh aapko kya huwa. Main bhee chonkee to daikha ki bhaiya ke kandhe par neel paree huwee hain. Maine daikha to bheetar tak hil gayee aur soch'ne lagee ki kaheen raat ko maama kee jagah bhai to naheen the. Bhai thore se ghabra gaye aur maine bhee bhaiya ke qareeb jaakar daikha to wahan danton ke nishan saaf nazar aa rahe the. Mujhe achhee tarah yaad aaya ki maine maama ke daahine kandhe ko buree tarah kaata tha, jab unka lund mairee choot ke parde ko phaar raha tha. Bhai bhabee ko tasalee de rahe the,

Main farm house par khir'kee ke kinaare laite huwe tha so ho sakta he ki kissee keere ne kaat liya ho. Bhabee ne kaha,

Maine mana kiya tha na aur kaha tha na ki hall ke beech main so jao. Par meree kaun sun'ta hai. Bhaaya ne kaha,

Maama ko khir'kee ke paas thand lagee to unhone bistar khir'kee se door laga liya, tab main papa ke samne wale hissah main lait gaya ki kaheen papa ko raat ko koee zururat ho to main waheen hoon. Mairee peshanee par passena aa gaye aur abhee main khof zadah ho hee rahee thee ki bhabee kee aur halkee see cheekh ne mujhe chonka diya. Woh bhaiya par naaraz ho rahee thee aur poochh rahee thee,

Woh chadar kahan hen jisper aap soye the. Bhaiya ne kaha,

Chader par chaay gir gayee thee so maine dry cleaner ko dhone ke liye bhij'vaa dee he aur kal mil jaayegee. Bahbhee ko yeh chadar bohat aziz thee choonki yeh wahee sheet thee jisper bhabee dulhan bankar pah'lee baar bhaiya ke saath apnee sohag raat manaayee thee aur chudee thee.
Mujhe kato to lahoo naheen. Main thar thara ne lagee aur apne kamre main chalee gayee. Ab to koee shak nahee tha ki guzishtah raat mere saath maama nahee the. Maine apne sage bade bhaiya ke saath usee chadar par apnee jawanee ka lutf uthaaya tha joki bhaiya aur bhabee kee sohag raat kee thee. Bhai ne socha us raat unkee koi cousin hogee jo raat men ap'ne tan kee aag thandee kar'ne un'ke paas aa kar so gayee. Subah jab chadar par khoon dekha hoga aur phir usse raz khul jaane kee wajah se nokar ke hathon dry cleaner ko bhijwa diya . Bhaiya ko kya maloom ki unhon ne raat ko apnee chhotee bahen kee choot ko choda tha aur wahee chadar thee jisper unhon ne pah'lee baar bhabee ko choda tha. Main ab kuchh normal huyee aur tamam bathon ko sochne lagee. Dinner main chup chup rahee aur maira zameer malamat kar raha tha ki yeh kya ho gaya.

Raat ko bed par laite huwe main sab kuchh soch'tee rahee aur bhai ne kis tarah mujhe choda tha aik aik tafseel yad aa rahee thee. Bhai ke baare mai sochte huwe mujhe un yadoon main aik naya pan laga aur main sochne lagee ki bhai ne kiss mohabat se mujhe pah'lee baar choda tha aur soch rahe honge ki woh kaun thee. Yeh sochte sochte main so gayee aur subha bahut dair se ankh khulee. Main college bhee naheen gayee aur tamam din soch thee hee rahee. Ammee papa sab ne puchha aur shaam ko maama aaya tho unhon ne bhee poochha maine kah diya ki main thak chukee hoon. Main soch rahee thee ki maama app keyon wahan se hate aur yeh bhee socha ki maama ap kithne badnaseeb hain ki aissa hasseen waqt ganwa diya. Main isee fikar main thee aur bhai ka sex ka andaz kuchh zeyadah hee yad aa raha tha.

Ab main bilkul mutmain ho gayee thee main koee anokhee larkee naheen hoon jisne apne bhai se chud'waaya he. Maine suna he aur internet par; yahoo group; deshiromance men padha bhee hai ki hazaron lar'kiyon ne apne papa ya bhaaiyon ke saath chud'waaya he. Yes soch kar kuchh sukoon huwa aur aik naayee tabdeelee aayee ki main bhai se sex kee. Yaadon ko tazah kar ke khush ho rahee thee. Do teen din main mairee kafiat badal gayee aur ab bhaiya kee aik aik baat aur aik aik cheez pehle se bhee jyaada achhee lagne lagee. Din guzar'te rahe aur main khush hotee rahee ki bhai ne maire ko choda. Bhai jab samne aate to mujhe woh shoulder wala nishan nazar aata aur vah ithna gehra tha ki ab bhee maujood tha.

Maire bed kee sheet mailee(dirt) ho gayee thee main bhabee ke pass chadar mangne gayee to bhabee ne wahee chadar mujhe daidee. Maine apne bed par woh chadar bichhadee aur main khush thee ki yeh wahee chadar he jisper maine aur bhabee ne zindagee ka pehla sex kiya tha. Inheen yaadon men kuchh din gujar gaye. Is beech bhaabhee bhee kuchh dinon ke liye pihar chalee gayee.

Phir ek din main apne kamre men baithee tv daikh rahee thee ki bhai aa gaye aur maire bath room main shower laine chale gaye. Jab bhai shower le raha the to main soch rahee thee ki bhaiya nange ho kar kaisse lag rahe honge aur bhabee kit'nee khush naseeb hain ki bhaiya jaissa sehat mand shohar mila aur maze se sex karne wala mila he. Bath room se shower kee awaz sunkar maire dil main aik kheyal aaya aur main jaldee se bath room ke ventilation ka pass pahoonch gayee jo ki galleree main khul'ta tha. Wahan stool qareeb tha aur usper kharee hokar jhanka to bhaiya nange shower le rahe the.

Kya haseen pur kashis jism tha bhai ka aur wahan se bhaiya ka woh lund nazar nahee aa raha tha jo kuchh din pehla mairee choot kee aghosh main tha. Bhaiya ke bhare bhare bazoo aur chora chakla seena bus dil chah raha tha ki unke seene se liput jaoon. Bhaiya ne shower band kiya aur main jaldee se bed par aa gayee. Yah kahaanee aap yahoo groups; deshiromance men padh rahe hain. Maira dil balyoon uchhal raha tha aur main soch hee rahee thee ki kash bhaiya khud hee maire pass aa jaayen aur apnee peyaree chhotee bahen ko ek baar phir vahee maja de lekin aissa mumkin naheen tha. Bhaiya hasbe aadat short pahne huwe aur beghair baniyaan ke towel haath main jhoolaate huwe kamare main aa gaye. Main bed par seer'haane takiya laga kar letee huyee thee.

Television par bhaiya ka pasandeedah program aa rah tha. Bhaiya maire bed par baith gaye aur program daikhne lage. Main bhaiya ka geela geela nojawan jism daikh rahee thee jo mujh se aik inch ke fasle par tha. Yeh wahee pur kashish aur sexy jism tha jo mujhe apne se chip'ka chukka tha. Wahee jism maire samne tha aur sirf short main tha laikin main is jism kee hokar bhee us se chimatne to kahan main haath bhee naheen laga rahee thee. Bhai tv program daikh rahe the aur main bhaiya ke kandhe ko jis par ab bhee waheen maire danton ke nishan the. Mujhe tasawur main bhaiya maire ooper laite huwe aur mujh se sex kar'te huwe nazar aa rahe the. Main dil hee dil main khush thee ki bhaiya ke shoulder par maire danton ke nishan the. Main andar hee andar peeghal rahee thee aur bahut dil chah raha tha ki bhaiya mujhe galle laga lain. Maine kaha ki

"bhaiya yeh insect ka nishan to bahut hee gahra he ap koee mal'ham naheen laga rahe" bhaiya ne kaha,

Are chhoro ! Yah maamoolee ghaav ap'ne aap theek ho jaayega. Maine phir kaha,

Ap bhabee se kahain ki kam as kam isse hathon se sehlaayen taki jald theek ho jaay. Bhaiya ne kaha,

Theek he aaj to tumharee bhabee maike (parents home) gayee huwee hain. Main bahut hee garam ho rahee thee aur dil bhee taizee se dharak raha tha. Main bed par se uthee aur khud hee kaha ki laiye main sehla daithee hoon. Main bhaiya ke peechhe baith gayee aur sehlana shuru kar diya. Bhaiya tv main magan the. Maine halke halke apne danton ke nishan ko sehlana shuru kar diya aur woh raat maire saamne thee jab bhaiya ka lund maire choot ke andar tha aur maine pain kee wajah se unke shoulder par khub zor se kata tha.

Bhaiya ka jism nahane ke bawujood garam tha aur unke shoulder ko sehlana bahut hee achchha lag raha tha. Maine sehlathe huwe us nishan par apnee zuban rakh dee. Bhai ne aik dam kaha ki arre yeh kiya kar rahee ho. Maine kuchh jawab naheen diya aur dharakthe dil ke saath maine unkee kamar par 3 time sss likh diya. Bhaiya aik dam chonke aur tv se unkee tawajah haath gayee. Maine aik baar phir apnee unglion se unkee nangee kamar par pehle aik s phir doosra s aur phir teesra s likha. Jyonhee maine teenon s likhe bhaiya aik dam chonk gaye aur bed par se baithe baithy is tarah mairee taraf rukh kiya jaisse unhain bichhoo ne kaat liya ho. Unhone mairee taraf rukh kiya aur maine unkee taraf daikha aur kaha,

Bhaiya sorry us raat maine zor se kat liya tha. Yeh sunna tha ki bhai ke chehre par aik rang aa raha tha aur doosra ja raha tha. Unko sak ho gaya tha woh mairee taraf daikh rahe the aur main nigahain neechee kiya bed kee taraf dekh rahee thee. Koee aik minute tak kamra main tv kee awaz ke elawah khamoshee thee. Maira dil buree tarah dharak raha tha ki dil halaq se bahar nikal ne ko tha. Bhaiya aik dam badhe aur mujhe galle laga liya aur mujhe choomne lage. Bhai ne mairee ghabrahat aur mushkil asan kar dee. Main bhee bhaiya se lipat gayee aur unhain pyaar karane lagee. Isee doran bhaiya ne mujhe bed par lita diya aur maire pehloo main aakar maire honton ko kiss kar'ne lage.

Maira jism khushee se sarshar tha aur main bahut hee khush thee. Kuchh dair tak mujhe kiss kiya to bhaiya ke short main se lund ne uthna (stand) shuru kar diya. Joki mairee tangon ke beech, mairee choot ke neeche mehsoos ho raha tha. Bhaiya ne mairee shalwar utaar dee aur phir mairee shirt ko bhee utaa kar mujhe nanga kar diya. Main bistar par laitee huwee thee aur ab bhaiya ne apnee short bhee utaar kar nange ho gaye. Ab ham donon nanga hoker aik doosre ko pyaar kar rahe the. Bhaiya bahut hee khush nazar aa rahe the aur main bhee khush thee. Lekin dono aik doosre se koee baat naheen kar rahe the. Bhaiya mjuhe honton par choomthe huwe neeche chale gaye aur mairee choochiyon par pahoonch gaye aur mairee choochiyon ko choomna shuru kar diya. Main bhaiya ko daikh rahee thee ki woh kiss buree tarah mairee choochiyon ko choos rahe the.

Us raat ko bhee mairee choochiyan choos rahe the lekin us raat andhera tha aur kuchh nazar naheen aa raha tha aur aaj to kamra tube light se khub roshan tha aur her cheez nazar aa rahee thee. Bhaiya ab maire peroo par the aur wahan apnee karee zuban se gud guda rahe the. Maire jism ke rongte khare ho gaye the. Maira jism khub garam ho gaya tha aur main sirf maza le rahee thee. Bhaiya peroo ko chor kar maire pairon main aa gaye aur maire pairon ke tale ko chatne lage. Bhaiya ka pairon ko chatna ajeeb aur lazzat se bhar pur laga lekin iss se zeyadah bhaiya kee mohabbat ka izhar achchha laga. Bhaiya ab pairon ke aik aik hisse ko chaat'te huwe ooper kee aur badh rahe the. Mairee dono thighs ko chatne lage to maire jism main jhur jhuree see bhar gayee. Ab woh mairee choot tak pahoonch chuke the aur jab choot par zuban rakhee to maire andar aik naya toofan barpa ho gaya.

Bhaiya kit'nee mohabat se maire jism ke aik aik hisse ko chaat'te huwe mairee choot ko chat rahe the ki unkee mohabbat aur andaz ne mujhe paagal kar diya. Main khud ko bahut hee khush naseeb mehsoos kar rahee thee aur khush thee ki us raat maine maama ke bajay bhaiya se chud'waaya tha. Bhaiya kee nokeelee zuban mairee choot ko khub chat rahee thee. Kabhee zuban kee nok choot ke andar aa lagtee to kuchh naya lag'ta aur jab apnee zuban se puree choot ke bahar chaat'te aur bhee bhala lag'ta. Uswaqt maine socha ki woh larkian kit'nee khush qismat hongee jo apne sage bhaiyon se choot mar'vaatee hongee. Haqeeqat main jiss se mohabat ho us se mar'vaane ka maza hee kuchh aur hotha he. Apne bhaiya ka jism apna apna lag raha tha.

Bhaiya mairee choot ko buree tarah geelee kar chuke the. Maire jism kee aag thee ki dahek hee rahee thee. Bhai ab mairee dono tangon ke beech aa gaye aur ab apna lund mairee choot main dalne lage. Unhon ne mairee tangon ko phela kar beech main apne liye jagah banaayee. Main ab tak bhaiya ke lund ko daikh nahee paayee thee aur khuwahish thee ki unke lund ko daikhoon. Bhai ka lund mairee choot par tha aur ab andar aane wala tha. Bhaiya ka lund mairee geelee bur ke andar dakhil hone laga aur mairee choot bhee unke lund par lapakne lagee choonki bahut dair se pyasee thee. Lund andar aa raha tha aur aaj mujhe dard bahut hee kam tha. Bhaiya ne lund thora sa andar kiya aur maire ooper lait gaye. Jyonhee bhaiya ko apne qareeb paaya maine unko apnee banhon main le liya aur unko bhookee shairnee kee tarah choomne lagee.

Bhaiya ne bhee mujhe lipta liya aur unka lund bhee andar hone laga. Pyaare aur mujh se 12 years baare sage bhaiya ka lund apnee sagee chhottee 17 saal kee bahen kee choot main dheere dheere andar aa raha tha. Bhaiya ka lund ab puree tarah andar aa chuka tha aur bhaiya ne lund ko andar bahar kar'na shuru kar diya tha. Dard to tha lekin usdin ke muqable main kuchh kam tha lekin main bardasht kar rahee thee aur uff naheen kar rahee thee. Kaheen mujh se is qadar pyaar karne wale bhaiya fikar mand naheeh ho jain. Bhaiya mujhe choom rahe the aur bahut hee ehteyat se apne lund ko andar bahar kar rahe the ki kaheen mujhe takleef na ho jaay. Main bhaiya ko khub choom rahee thee aur aik baar phir main bhaiya ke kandhe par usee jagah choomne lagee. Bhaiya ne khamoshee toree aur kaha,

Kyon sama ! Phir kaat'ne ka iraada hai kya? Maine kaha,

Naheen bhaiya us raat yah mere saath pah'lee baar huwa tha aur us waqt maira dard na qabile bardasht tha. Bhaiya ne yeh suna to mairee peshanee par apne hont rakh diye aur sorry kaha. Bhaiya ka lund abhee andar hee tha aur mairee choot main is'tarah fit ho chuka tha ki agar needle bhee dalo to na jaaye. Bhaiya ab baaten kar rahe the aur poochha,

Sama janoo yeh kaise huwa.. Bhaiya jab bahut pyaar kar'te to janoo hee kahte. Maine kaha,

Tairaakee kar'te huwe jab aap bhabee ke saath khel rahe the to maira bahut dil chaha ki aap mujh se khelain choonki aap ko maine aik baar bhabee ko yah kar'te kar'te huwe daikh liya tha jab se maira dil chaah raha tha ki aap mujh se bhee isee tarah karain. Bhaiya ka lund mairee choot ke andar khamosh baitha huwa tha aur main musalsal jhoot bol rahee thee. Bhaiya ne phir kaha,

Tum'ne jab dekha tab main tumhaaree bhabhi ke saath kya kar raha tha? Tum ne 3 baar s kyon likha tha? Maine kaha,

Bhaiya jo aap abhee mere saath kar rahe hain, vahee bhabhi ke saath kar'te huye maine aap'ko dekha tha. Aur 3 s ka matlab maine apna pura nam ise liye likha tha ki aap mujhe pehchan lainge. Isper bhaiya hans pare aur kaha,

Yeh to ab maloom huwa ki 3 s ka kya matlab he warna main to ab tak naheen samjha tha. Bhaiya mairee ankhon main daikh rahe the aur poochha,

Pah'lee baar dard to bahut huwa hoga. Par tumj ko bhee man'na parega ki us raat mera poora ghont gayee thee. Maine kaha,

Dard naheen balki us raat to mere oopar qeyamat barpa thee. Jab aap bhabee se yah kar rahe the to us waqt bhee apka yeh bhabee ke andar tha aur is'kee size main theek se dekh naheen paayee, warna main shaayad pehle se zehnee tor par taiyaar hotee. Main bhaiya ke samne lund ya choot ka naam, bawujood sex kar'ne ke, nahee le paa rahee thee. Bhaiya ne jab suna ki maine unka lund naheen daikha to unhon ne foran apna lund bahar nikal liya aur maire pehloo main lait gaye. Main sab samajh gayee aur bijlee kee see taizee ke saath baith gayee. Bhaiya ka lund bahut hee haseen lag raha tha jaise puree duniyan main waheen aik lund he bahut hee maghroor lag raha tha aur chhat kee taraf apnee aik ankh se daikh raha tha.

Maine bhaiya ke lund ko daikha aur phir apne pyaare bhaiya ke lund ko hathon se thaam liya. Kis qadar bara tha ki mairee hathailee (palm) se bhee lamba tha aur mota bhee ithna ki maire hathon main naheen sama raha tha. Gol matol aur khub tandurst lund ithna baiqaboo aur garam tha ki maire hathon main ruk hee naheen raha tha. Bhaiya seedhe laite huwe sab kuchh daikh rahe the ki main kis tarah naadeedy(greedy) kee tarah apne bhaiya ke mast lund ko daikh rahee thee. Main bhaiya kee tangon ke beech aa gayee aur baitaabee se bhaiya ke lund par apne gulaabee hont rakh diye. Oho yeh to maire moonh main baree mushkil se aa raha tha. Maine ice cream kee tarah bhaiya ke lund ko choosna shuru kar diya. Kithna pyaara lund tha aur use choomne me kithna maza aa raha tha.
Bhai ka lund halka halka namkeen lag raha tha aur yeh mairee choot kee lazzat thee jo main lund ko apnee zuban se chat rahee thee. Sifr aadha lund maire moonh main aa raha tha aur woh bhee buree tarah phansa huwa tha. Maine lund ko hathon se pakra huwa tha aur moonh main dal kar andar bahar kar rahee thee. Mujhe to maza aa hee raha tha bhaiya bhee maze main machal rahe the aur maire balon ko sehla rahe the. Bhai ka lund maire moonh main tha aur aissa lag raha tha ki jaise lund kee hazaron nabzain(veins) hil rahee ho. Main lund ko choosne ke liye kab bistar se uth kar bhaiya kee tangon ke beech chalee gayee, mujhe pata hee naheen chala. Bhaiya ka seena khub bhara huwa tha aur donon mardana nipples brown color ke the. Bhaiya ka pathar(stone) kee tarah sakht seena bahut hee chora tha aur main pure seene ke aik aik inch ko mastee main sah'la rahee thee.

Aakhir maire hee sage bhaiya ka seena tha kisee aur ka nahee. Bhaiya ne mujhe pakar karke oopar kheench liya aur un'ke hont ab maire honton main the aur bhaiya kee sansain maire chehre se tak'ra rahee thee. Bhaiya apnee chamak daar aur khub roshan aur koot koot kar bharee huwee baree baree ankhon se mujhe daikh rahe the jabki unka lund mairee choot ke neeche daba huwa edhar udhar bhag'ne kee koshis kar raha tha. Yah kahaanee aap yahoo groups; deshiromance men padh rahe hain. Main uthee aur apnee zuban se lund ko aik baar phir geela kiya aur daikha ki lund bilkul bheeg chukka he. Ab ham dono ke beech koi sharm or haya to thee naheen. Maine apne dono pair bhaiya kee chuttar kee thighs ke dono taraf rakhe aur unke lund par apnee choot rakh kar baithne lagee.bheega huwa magar khub taiyaar jawan lund main jyon hee baithee, andar aane laga. Maine dono haath bhaiya ke seene par rakhe aur ahistah ahistah apna bojh(weight) bhaiya ke lund par dalne lagee. Bhaiya ne maire dono choochiyon ko pakra huwa tha aur sehla rahe the. Main sir jhukaaye bhaiya ke lund ko apne andar aathe huwe daikh bhee rahee thee aur bhaiya choochiyon ke elawah mairee kamar ko bhee sehla rahe the. Lund ko daikh rahee thee kis tarah mairee choot ko cheer'ta huwa andar aa raha tha aur mairee choot ke undrooni hise main aik jashn ka sama tha. Pura jism gun guna raha tha ki bhaiya ka lund apnee bahen kee choot ko pehchan kar andar aa raha tha us raat to maloom hee naheen tha ki lund kiss kee choot main tha jabki khus qismat choot ko bhee naheen maloom tha ki kiska lund andar aa raha he.

Lund kee health ne mairee choot aur rooh main aik dhamaka kiya huwa tha. Lund andar aa chuka tha aur ab maine bhaiya kee taraf sir utha kar daikha to woh muskura rahe the. Main unke seene par laite huwe un per jhuk gayee aur unke honton ko apne honton se sakhtee se pakar liya. Maine kaha,

Bhaiya yeh wahee chadar he jisper maine aur bhabee ne aapse pehlee baar kar'vaaya tha. Bhai ne yeh suna to aur bhee jazbatee ho gaye aur maire ankhon ko choosna shuru kar diya. Unka lund bhee yah sun liya tha. Woh bhee choot ke andar hee hilkar apnee is khushee ka élan kar raha tha. Main bhaiya ke lund par ooper neeche hone lagee aur dard jo ho raha tha woh achchha lag raha tha. Main bhaiya ke lund ko choot se pyaar kar rahee thee aur andar bahar karne ka khel khel rahee thee aur lund bhee pura saath dai raha tha. Bhai jan mairee zuban ko choos rahe the aur unhon ne apane hathon se kamar ko bhee pak'ra huwa tha.

Main bhai kee peshanee par hont rakhee huwee thee aur mairee choochiyan bhaiya ke honton par thee. Maira dil bhee chaah raha tha ki bhaiya maire masoon aur ubhree huwee choochiyon ko choosain aur ve achhe bhaiya kee tarah choos rahe the. Main khub mast ho chukee thee aur lund ko yoon andar bahar kar rahee thee ki jaise lund ko saza(punish) de rahee hoon. Ab main aur taiz ho gayee aur mairee sansain bhee taiz ho gayeen. Main it'nee zor zor se bhaiya ke lund par uth kar baith rahee thee ki jab lund par baith'tee to tv kee awaz ke bawujood dhap kee awaz aatee. Bhai ke lund main bhee andar hee andar kuchh zeyadah halchal machee huwee thee. Bhaiya ne mairee maansal gaand par apne haath rakhe huwe the aur woh bhee mairee chuttar ko khub zor laga kar bheench rahe the.

Ham dono kee ankhon kee chamak aur rooh kee tarap badh chukee thee aur ab aik mashine (mechin) kee tarah bhai bahen ke lund choot ka muqablah ho raha tha. Maire bhaiya ke lund ne apnee thamee huwee mohabbat mairee choot main ugal dee aur mairee choot ne bhee apna sab kuchh ugal diya. Ham dono ruk gaye the aur aik doosre ko honton aur gaalon par khub kaat rahe the. Bhaiya kabhee labon ko, kabhee gaalon ko aur kabhee ankhon ko choom rahe the aur main bhee is'tarah unhain pyaar kar rahee thee jaise maa roothe huwe bache ko pyaar kar'tee ho.

Maira jism phoolon kee tarah halka phulka ho chuka tha. Bhaiya ka lund bhee mairee choot ko chod karke nikal chukka tha. Main uthee aur maine aik baar bhaiya ke lund ko daikha ki woh is halat main bhee kithna bada tha. Maine use apnee ankhon se laga kar pyaar kiya aur bhaiya kee pehloo main aa gayee. Maine bhaiya ko galle laga kar chooma aur bhai ne bhee mujhe pyaar kiya. Bhaiya chale gaye aur main lucky chadar ko daikh'tee rahee jo aaj phir sage bhai bahen ke milap se geelee ho gayee thee. Bhabee to thee naheen raat ko bhaiya apnee janoo ke bistar par aa gaye aur phir waheen huwa jiska hamain shoq naheeh junoon tha.

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