भाभी पर चांस मारा

Wednesday, December 4, 2013

बात उन दिनों की है जब मैंने बारहवीं के इम्तिहान दिए
थे। मेरे भाई-भाभी मुम्बई में रहते हैं, मैं रिजल्ट निकलने तक
मुम्बई चला गया। मैं दिल्ली से कभी बाहर नहीं गया था,
यह मेरा पहला मौका था पर मुझे कभी उम्मीद
नहीं थी कि पहला मौका हमेशा के लिये यादगार रहेगा।
मैं मुम्बई स्टेशन पर पहुंचा, मेरा भाई मुझे लेने के लिए
वहां पर आया था। मैं उनके साथ घर चला गया। जब घर
पहुंचा तो भाभी से मिला और फिर मैंने फ़्रेश होकर
खाना खाया, मेरी भाभी और भाई बहुत अच्छे हैं। पड़ोस में
एक सेक्सी भाभी रहती हैं, उनके पति मेरे भाई के साथ
ही काम करते हैं। मेरी उनसे भी जान पहचान हो गई और मैं
उनके घर भी जाने लगा और सुजाता भाभी (पड़ोस
वाली भाभी) को भी अपनी भाभी की तरह इज़्ज़त
देता था। सात-आठ दिनों में मैं उससे घुल-मिल गया जैसे
वहीं पर सालों से रहा हूँ और उन्हें जानता हूँ। मेरा भाई
और पड़ोस के भाई एक ही पोस्ट पर काम करते हैं
सो उनको काम से मुम्बई से 15 दिनों के लिए बाहर
जाना था। वो चले गये। मेरी भाभी को भी एक
सहेली की शादी में पुणे जाना था, वो उनकी सबसे
अच्छी सहेलियों में से एक थी, उनको १ सप्ताह के लिये
जाना था, सो वह अपने कपड़े सम्भाल रही थी। भाभी ने
मुझसे कहा- तुम भी मेरे साथ पुणे चलो ! पर मुझे न जाने
क्यों पुणे जाने का मन नहीं था, मैंने भाभी से कहा- मुझे
वहां कोई नहीं जानता, आप जाओ। उन्होंने कहा- नहीं !
चलो ! और मुझे पर जोर देने लगी। फिर मैंने बहुत
मना किया तो वो मान गई। फिर उन्होने मुझसे
सुजाता भाभी को बुलाने के लिये कहा। मैंने
भाभी को बुलाया और भाभी ने सुजाता से कहा- मैं शादी में
जा रही हूँ, तुम विवेक के लिये खाना बना देना।
सुजाता भाभी ने कहा- कोई बात नहीं ! अगर आप
नहीं कहती तो भी मैं विवेक के लिये खाना बना देती। और
फिर भाभी अगले दिन चली गई। मैं घर में
अकेला था सुजाता भाभी ने मुझे नाश्ता करने के लिये
कहा और मैं उनके घर चला गया। नाश्ता करने के बाद मैं
अपने फ़्लैट में जाने के लिये हुआ तभी सुजाता भाभी ने मुझे
कहा- विवेक, वहाँ अकेले क्या करोगे? यहीं पर रहो ! और मैं
भी सोच रहा था कि वहाँ क्या करुंगा और फिर हम
दोनों बात करने लगे। बातों बातों में उन्होने मुझसे पूछा-
तुम्हारी कोई गर्लफ़्रेंड है? मैंने कहा- भाभी, अभी तो मैं
बच्चा हूँ, मेरी कोई गर्लफ़्रेंड कैसे हो सकती है? वो हंसने
लगी। पता नहीं क्यों अब मुझे उनमें रुचि होने लगी थी।
मैंने उनके वक्ष की तरफ़ देखा। उनके स्तन काफ़ी बड़े हैं
उनकी फ़ीगर 38-29-38 होगी। वो हमेशा घर में रहती हैं
तो हल्के कपड़े पहनती हैं, उनकी ब्रा साफ़ नज़र आती है।
जब वो हंस रही थी, मैंने भी पूछा- भाभी, तुम्हारा कोई
ब्वोयफ़्रेंड है या शादी से पहले कोई था? तो वो चुप
हो गई और कहने लगी- नहीं विवेक। हमने बाते की और
दोपहर और रात का खाना खाया। रात को मैं अपने फ़्लैट
में सोने के लिये जा रहा था तो भाभी ने एक बार फिर
मुझसे कहा- यहीं सो जाओ ! मैं अकेली हूँ। मुझे डर लगता है।
उन्होंने मुझे सोने के लिये कमरा दिखाया और कहा- अगर
रात कोई प्यास लगे तो मेरे कमरे में आ जाना,
क्योंकि वहीं पर फ़्रिज है। मैंने कहा- ओके। फिर मैं
सो गया। यारो, मुझे रात कभी प्यास नहीं लगती पर न
जाने क्यों उस रात मुझे प्यास लगी और मैं भाभी के कमरे में
चला गया। कमरे में अंधेरा था, मैंने मोबाइल की लाइट ऑन
की और मुझे फ़्रिज़ मिल गया। मैंने फ़्रिज़ से बोतल निकाली,
पानी पिया और फिर बोतल रखी। जैसे ही फ़्रिज़ बंद कर
रहा था कि मुझे बेड पर भाभी सो रही थी, फ़्रिज़
की लाइट से वो दिख रही थी, अचानक मेरी नज़र उनके
बदन पर गई। मैंने देखा कि वो नाइटी पहन कर
सो रही है। नाइटी से उनकी नंगी टाँगें दिख रही थी।
ओह माय गॉड ! उनकी टाँगें कितनी चिकनी थी। फिर
मेरी नज़र ऊपर गई तो देखा कि उनकी छाती से
नाइटी खुली है और उनकी ब्रा दिख रही है। मुझसे
रहा नहीं गया और मैं फ़्रिज बंद करके अपने कमरे में
चला गया। उनको देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया और मैं
उनको चोदने की सोच कर अपने कमरे से निकला पर उनके
कमरे पर जाते ही मुझे अच्छा नहीं लगा क्योंकि मैं उन्हें
भी भाभी की तरह मानता था और मेरे कदम रुक गये। रात
भर सपने में वो ही नज़र आई। रात को देर से सोया इसलिये
सुबह नींद नहीं खुली १० बज रहे थे भाभी ने मेरे कमरे में आ
कर मुझे उठने को कहा। उन्होंने पूछा- तबीयत तो ठीक है?
मैंने कहा- हां सही है। देर से क्यों उठे? मैंने कहा-
पता नहीं भाभी, आज नींद कुछ ज्यादा ही आ गई। उन्होंने
कहा- ओके ! और कहा कि अपने फ़्लैट में फ़्रेश होकर आ जाओ
फिर हम नाश्ता करेंगे। मैंने कहा- सही है ! फिर मैं
चला गया और नहा-धोकर मैं भाभी के फ़्लैट में आया। फिर
वहीं रात हो गई। भाभी ने वही कहा- प्यास लगे तो मेरे
कमरे में आ जाना ! और चली गई। मुझे रात को नींद नहीं आ
रही थी और पानी लेने के लिये फिर उनके कमरे में
चला गया। फिर वही सीन, यार, मुझे भाभी को चोदने
को मन कर करने लगा पर हिम्मत नहीं कर पाया। अगले
दिन वही रात में फिर मैं पानी के लिये गया। इस बार
सीन कुछ और था भाभी ने ब्रा नहीं पहनी थी और
उनका एक स्तन साफ़ दिख रहा था। मेरे लंड में तनाव आ
गया। पहली बार मेरे लंड में इतना तनाव आया था। मैं
अपने कमरे में आ गया और मुझसे से रहा नहीं गया और मैंने
पहली बार ज़िंदगी में मुठ मारा। अगले दिन फिर
वही रात ! फिर भाभी ने कहा- प्यास लगे तो मेरे कमरे में
आ जाना ! और स्माइल दे गई। मुझे इस बार स्माइल
सीधा दिल पर चुभ गई। आधे घंटे के बाद मैं उनके रूम में गया,
मैंने देखे आज नज़ारा कुछ और है ! भाभी पैंटी और ब्रा में हैं
बस अब मुझसे नहीं रहा गया, मैंने नाइट लाइट ऑन की। अब
उनका शरीर लाल लाइट में पूरा लाल लग रहा था। मुझसे
रहा नहीं गया, मैंने भाभी के पैर को छुआ, फिर स्तन ! और
स्तनों को धीरे धीरे दबाने लगा। फिर पैंटी में हाथ
डाला और चूत पर हाथ फेरा, मैं बहुत गरम हो गया था पर
अब भी भाभी को चोदने की हिम्मत नहीं कर पर
रहा था। मुझे लगा कि अब बहुत हो गया, ज्यादा डर
भी रहा था कि भाभी को पता चल जायेगा। फिर मैं बेड से
अपने कमरे की तरफ़ जाने के लिये उठा तो अचानक भाभी ने
मेरे हाथ पकड़ लिया और बहुत ही धीरे आवाज़ में कहने लगी-
मुझे गरम करके कहां जा रहे हो? मुझे ठंडा तो करो। अब
तो मुझसे रुका नहीं जा रहा था, सीधे ही भाभी के
होंठों को चूसने लगा। एक हाथ वक्ष पर और एक हाथ चूत
पर ! भाभी भी मेरे होंठों को चूसने लगी और उन्होने
मेरी पैंट के अंदर हाथ डाल कर मेरा लंड पकड़
लिया जो कि पूरी तरह से चूत में जाने के लिये बेचैन था।
मैंने भाभी की ब्रा और पैंटी और अपने कपड़े भी उतार
दिए। मैं और भाभी पूरी तरह से नंगे थे। अब मैं उनके
स्तनों को चूसने लगा, फिर उनकी चूत को चाटने लगा और
वो तड़प उठी। उन्होंने मेरे लंड को मुंह में ले लिया, चूसने
लगी। फिर उन्होंने मुझसे लंड चूत में डालने
का इशारा किया। मैंने उनकी चूत में लंड डाल दिया। फिर
क्या ! मेरा लंड छः इन्च का है। मैंने धक्का मार-मार कर
पूरा लंड चूत में डाल दिया। भाभी आवाज़ निकाल
रही थी- अह्ह उह मर गई अहह ए ए जोर से ! फिर मैंने
भाभी से कहा- भाभी ! निकलने वाला है ! क्या करुं ?
उन्होंने कहा- मेरे मुंह में दे दो ! मैंने उनके मुंह में दे
दिया और उन्होंने पूरा माल निगल लिया। हमने भाभी के
आने तक रोज़ सेक्स का मजा लिया। फिर भाभी आ गई और
हमरा चूत मारने का सिलसला खत्म हो गया।और फिर भाई
और उसके पति भी आ गये लेकिन अब हम सब बन्द कर चुके थे
ताकि किसी को कोई शक न हो। फिर मैं दिल्ली आ
गया लेकिन आने से पहले मैं सुजाता भाभी से मिला और
उनको अपना कोन्टक्ट नम्बर दिया। वो मुझे अपना दोस्त
मानती हैं और हम दोनों कोन्टक्ट में रहते हैं।


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भाभी और उसकी बहन को जयपुर में चोदा - Hindi chudai story

Tuesday, December 3, 2013

मैं भाभी को हर रोज़ चोदता ! भैया को भी यह बात
पता चल गई जब भाभी को गर्भ हुआ। पहले तो बहुत
गुस्सा आया पर वो जल्दी समझ गए कि मुस्कान
को भी तो लंड की जरुरत है, जो वो नहीं दे सकते थे। जब
भाभी को बच्चा होने वाला था तब मैं उनके साथ सेक्स
नहीं कर पाता तो मुझे बहुत बुरा लगता। कुछ समय के लिए
मीनाक्षी (भाभी की बहन) आई, वो तो भाभी से भी मस्त
फिगर वाली थी, देखते ही मेरा लंड खड़ा होने लगा ... मैंने
भाभी से कहा- मैं मीनाक्षी की चोदना चाहता हूँ।
तो गुस्सा होती हुई बोली- कमीने पहले मुझे ! फिर
मेरी बहन को ? बहुत मस्ती आ रही है?
उसकी तो अभी सील भी नहीं खुली होगी और तू उसे
चोदना चाहता है? मैं नहीं चोदने दूँगी ! तुम सिर्फ मुझे
ही चोदोगे ! समझ गए...? मुझे इतना गुस्सा आया कि मैं यह
कहता हुआ घर आ गया कि अब मैं तुझे भी नहीं चोदूंगा....
देखता हूँ कि कौन तुझे चोदता है... फिर मैंने भाभी से
बातचीत बंद कर दी और मीनाक्षी से दोस्ती कर ली। अब
हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन गए। वो जींस-टॉप में
क्या माल लगती थी ! हम दोनों खूब मस्ती करते ... एक
दिन हम मार्केट गये, वहाँ वो लेडीज कपड़ो की शॉप पर
चली गई। मैं भी उसके साथ गया। वहाँ उसे पैंटी और
ब्रा पसंद आ गई, वो पहन कर देखना चाहती थी, ट्राई-
रूम में चली गई और कुछ देर बाद मुझे अन्दर आने को आवाज
लगाने लगी। मैं अन्दर गया तो देखता ही रह गया।
वो सिर्फ पैंटी और ब्रा में खड़ी थी, पूछने लगी- कैसी लग
रही हूँ? मैंने उसे पीछे से पकड़ते हुए कहा- बहुत मस्त !
इसी में घर चलो न ! वो हँसती हुई बोली- चल बदमाश !
इसमें तो सिर्फ तुम्हारे लिए आऊँगी ! और मुझे किस करते हुए
बोली- आई लव यू ! हम दोनों ने दो मिनट तक चूमा, फिर
मैंने कहा- यही पैंटी-ब्रा पहन कर चलना !( मतलब नई
पैंटी-ब्रा के ऊपर कपड़े पहन कर चलना) फिर हमने बहुत
सारी शोपिंग की और शॉपिंग के बीच-बीच में मैं उसके स्तन
दबा देता, लेकिन वो कुछ नहीं बोली। हमें
बड़ा मजा आया। वहाँ से हम सीधे मेरे घर गए
जहाँ ताला लगा था। चाबी भाभी के पास थी, मैं
चाबी मांगने गया तो बोली- मीनाक्षी कहाँ है? तो मैं
बोला- पहले चाबी ! फिर बताऊँगा ! चाबी लेने के बाद मैं
बोला- आज तो हम लोग चुदाई करेंगे ! रोक सको तो रोक
लो ! उन्हें बहुत गुस्सा आया पर वो तो कमरे से बाहर
भी नहीं निकल सकती थी। मैंने ताला खोला और हम
दोनों अंदर चले गए। दरवाज़ा बंद करते ही मैं उसे गोदी में
उठाकर अपने कमरे में ले गया और बेड पर लिटा कर चूमने
लगा। वो भी साथ दे रही थी, हमें बड़ा मजा आ रहा था।
मैंने उसका गुलाबी टॉप उतारा और नई ब्रा में से ही उसके
स्तन दबाने लगा, वो आहें भरने लगी- ह्य्य्य्य रोहित !
बड़ा मजा आ रहा है ! मैंने उसकी ब्रा उतारी और एक चुचूक
को मुँह में चूसने लगा ! बहुत मजा रहा था दोस्तो ! फिर मैं
उसकी ब्लू जींस उतारने लगा। उसकी चूत
गीली हो चुकी थी, मैं पैंटी में से
ही उसकी बालों वाली चूत को सहलाने लगा। सहलाते हुए
ही मुझे पता चल गया कि उसकी चूत अभी कुंवारी है,
तो मेरा लण्ड और फूलने लगा... और सोचने लगा- यार मैं
तो बड़ा किस्मत वाला हूँ ! दो चूत मिली वो भी सील
पैक ! अब वो बोली- यार तुम भी तो अपना लौड़ा मेरे मुँह
में डालो ! मैं कितनी देर से इन्तज़ार कर रही हूँ ! मैं
बोला- जानेमन, अभी आता है मेरा लंड ! और उसे खड़ा करके
बोला- चल जान, खोल दे मेरे कपड़े और
बुझा अपनी प्यास .... फिर वो जल्दी जल्दी मेरे कपड़े
उतारने लगी। तीन मिनट में मुझे नंगा कर दिया ...
मेरा ७.५ इंच लम्बा लौड़ा बाहर आ गया ... मीनाक्षी ने
आव न देखा ताव ! मेरा लौड़ा मुँह में लेकर चूसने लगी ...
क्या तो चूस रही थी ! कसम से बड़ा मजा आ रहा था.. कुछ
देर बाद बोली- यार, अब चूत की प्यास बुझाओ ! मैंने धीरे
धीरे उसकी चूत में अपना लौड़ा डाला, क्योंकि उसकी सील
खोलनी थी, जिसमें बड़ा दर्द होता है... इसलिए मैं
पहली बार आराम से ही चुदाई करना चाहता था। मैंने
धीरे-धीरे चोदते हुए पूछा- दर्द हो रहा है? बोली-
ज्यादा नहीं ! जितना सुना था उससे काफी कम .... कुछ देर
में उसकी चूत की सील टूट गई ...वो एक बार जोर से
चिल्लाई- उई माँ ! मर गई.. फिर बोली- रोहित, अब
मजा आ रहा है...स्पीड में चोदो यार ! फिर मैं बहुत तेज़
स्पीड में चोदने लगा। कभी घोड़ी बना कर
चोदता तो कभी दोनों हाथों से गोदी में उठा कर
चोदता ... हम दोनों को काफी मजा आया। हमने शर्त
लगाई- देखते हैं पहले कौन पहले झड़ता है... 25 मिनट
हो गए, कोई नहीं झड़ा... कुछ देर बाद मीनाक्षी की चूत
गीली हो गई। मैं बोला- तुम हार गई... उसे
गुस्सा आया और बोली- मैं तुम्हारा पानी नहीं निकलने
दूंगी ! और चूत से मेरे लण्ड को निकालती हुई पीछे हट गई...
मैं बोला- यार जब तक मेरा पानी नहीं निकलेगा, सेक्स
का मजा कैसे आएगा? तो बोली- मैं क्या जानूँ ? हाथ से
निकाल लो... मैंने काफी मनाया फिर बोली- पानी मेरे
मुँह में डालोगे ? मैं बोला- ठीक है... थोड़ी देर चोदने के
बाद में झड़ गया ... मैंने सारा पानी उसी के मुँह में डाल
दिया ... कुछ देर आराम करने के बाद फिर से उसे
चोदना शुरू किया कि बेल बज गई। मैंने जल्दी से कपड़े पहने
और मीनाक्षी को को पैंटी ब्रा में ही बेड के नीचे छुपने
को कहा, साथ कपड़े भी ले जाने को ... मम्मी आई थी,
बोली- क्या कर रहे हो? मैं बोला- नींद आ रही थी !
शॉपिंग का सामान देख कर बोली- ये सब कौन लाया? मैं
बोला- फ्रेंड का है ! मुझे नींद आ रही थी इसलिए अन्दर
नहीं रखा .. मम्मी थकी हुई थी इसलिए अन्दर चली गई।
मैं अन्दर गया और जल्दी से मीनाक्षी को जाकर कपड़े
पहनाये और उसके घर भेज दिया। फिर हमने खूब सेक्स
किया ... भाभी के बच्चा होने के बाद वो चली गई .. फिर
मुझे भाभी को ही चोदना पड़ा ... एक बार भाभी और
मीनाक्षी को एक साथ चोदा !

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आंटी की प्यास

Monday, December 2, 2013

आंटी की प्यास
यह जो कहानी लिखने जा रहा हूँ वो कल की ही बात है।
मेरे पड़ोस में एक आंटी रहती है उसकी कहानी है। मुझे यह
आंटी बहुत अच्छी लगती थी। क्या माल था। उसकी फ़ीगर
38-30-38 है। बड़े-2 चूतड़ और इतनी सेक्सी गाँड
थी कि मेरा लंड उसको देख कर तन जाता था। गाँड
का पूछो मत, मोटी मोटी गाँड ! जब जब
वो चलती थी तो गाँड हिलती रहती। जब जब मैंने
आंटी की गाँड देखा करता था मेरा लंड जोश में आ जता।
आंटी बहुत ही सेक्सी थी। बेचारी आंटी अंकल के काम
की वजह से एंजोय भी नहीं करती थी। उसके
पति आर्मी ओफ़िसर थे, अक्सर बाहर ही रहते थे। एक दिन
मैं उनके घर गया, सोनिया आंटी अकेली थी। मैंने आंटी से
पूछा कि सब लोग कहाँ है? आंटी ने जवाब दिया कि अंकल
का तो तुमको पता ही है और सभी बच्चे मामा के घर गये
हैं। आज रात को नहीं आयेंगे। फिर मैंने आंटी को कहा- ओके
आंटी, मैं चलता हूँ। आंटी ने मुझे रोक लिया और कहा-
अभी रुक जाओ, मुझे नहाना है, तब तक तुम मेरे घर का ख्याल
रखना। मैं अभी नहा कर आती हूँ। आंटी नाइटी में थी, पिंक
नाइटी में उनके वक्ष बड़े सेक्सी लग रहे थे, बोली- तू
मेरा पीसी भी ठीक करके जाना ! खराब है ! मुझे
नहीं पता था कि आंटी भी पीसी चलाना जानती हैं। मैं
रुक गया आंटी नहाने चली गई। मैं इनके बेडरूम में
आंटी का इन्तज़ार कर रहा था कि अचानक मेरी नज़र बेड
पर पड़ी, बेड पर तौलिया, पैंटी और ब्रा पड़ा था।
ब्रा और पैंटी बहुत बड़ी थी। तकरीबन 15 मिनट बाद
आंटी ने आवाज़ दी और कहा- तौलिया दे दो मुझे। मैंने
आंटी को तौलिया दिया फिर आंटी ने कहा- प्लीज़
मेरी पैंटी और ब्रा भी दे दो। मैंने आंटी को पैंटी और
ब्रा भी दे दी। अब आंटी नहा कर निकली। आंटी ने सफ़ेद
रंग का सूट पहना हुआ था। आंटी की काली ब्रा नज़र आ
रही थी। अब मैंने आंटी को कहा- आंटी अब मैं चलता हूँ।
आंटी ने कहा- तुम्हें कुछ काम से जाना है क्या? मैंने जवाब
दिया- नहीं ! फिर आंटी ने मुझे कहा- रुक जाओ ! मैं
अकेली बोर हो जाऊंगी। कुछ बातें वगैरह करते हैं। मैं बैठ
गया और आंटी अपनी लाइफ़ के बारे में बता रही थी। अब
आंटी कुछ खुल कर बातें करने लगी। मेरे से पूछने लगी-
तुम्हारी गर्लफ़्रेंड्स हैं या नहीं, कभी सेक्स किया है
या नहीं। मैं ऐसी बात सुन कर हैरान हो गया। अब मैं
भी खुल गया था। मैंने आंटी से पूछा- आंटी, आप को सेक्स
पसंद है? आंटी ने जवाब दिया- सेक्स हर किसी को पसंद
होता है पागल। क्या तुम्हें पसंद नहीं है आंटी ने कहा? मैंने
जवाब दिया- कभी किया ही नहीं है। आंटी ने कहा- झूठ
मत बोलो, मुझे मालूम है, तुम बहुत बुरे हो ! तुमने
अपनी काम वाली को चोदा है और नेहा को भी, मुझे सब
पता है और तुमने उन पर कहानी भी लिखी, मैंने
भी तुम्हारी कहानी कल रात को पढ़ी थी और मेरी चूत
गीली हो गई थी, जी करता था कि तुमको रात
को ही अपने घर बुलाकर अपनी प्यास बुझा लूँ, लेकिन बच्चे
घर पर थे। झूठ बोलता है, तूने अपना मोबाइल नम्बर भी दे
रखा है, लेकिन मैंने सोचा जब घर आओगे तब ही बात
करूंगी तुमसे। तेरी माँ को बोलना पड़ेगा कि तेरा विवाह
कर दे। मैं अचानक डर गया। आंटी ने कहा- डरो मत, मैं कुछ
नहीं कहूँगी ! मैंने तो तुमको नंगा भी देखा है। मैंने आंटी से
पूछा- कब देखा आप ने मुझे नंगा? आंटी ने जवाब दिया- जब
तुम मेरे घर के बाथरूम में पेशाब कर रहे थे। मैंने कुछ
नहीं कहा। मेरी भी चूत प्यासी है
क्या अपनी आंटी की प्यास नहीं बुझाओगे? कहानी में
तो लिख रखा है गुलाम हाज़िर है, अब चुप क्यों बैठे हो?
बोलो, अब तुम्हारा लंड प्यास बुझायेगा मेरी चूत
की प्यास को? मैं सोनिया आंटी की बातों से मन ही मन
खुश हो रहा था, सोचा नहीं था कभी कि आंटी खुद तैयार
हो जायेगी। मैं उनसे डरता भी था क्योंकि वो बहुत
गुस्सेवाली है। आंटी ने अब अपना हाथ मेरे लंड पर
रखा तो मुझे तब बहुत अच्छा लगा। मेरी आंटी बहुत
प्यासी थी वो बिल्कुल गोरी थी। उनकी उमर 38
की थी लेकिन अभी भी बिल्कुल जवान लगती थी।
ज़िंदगी में आज पहली बार 38 साल की औरत के साथ सेक्स
करने जा रहा था। अब आंटी ने मुझसे कहा- अपनी पैंट
उतारो ! मैं भी देखूँ तुम्हारा प्यारा सा लंड। मैंने
अपनी पैंट उतार दी। मैंने उस दन अंडरवियर
नहीं पहना हुआ था। मैं अब नीचे से नंगा था। आंटी मेरे पास
आई और मेरी शर्ट भी उतार दी और मुझे पूरा नंगा कर
दिया। आंटी को मेरा लंड बहुत अच्छा लगा। आंटी ने
मेरा हाथ अपने वक्ष पर रखा और कहा दबाते रहो प्लीज़।
मैंने खूब दबाये आंटी के स्तन। आंटी को मज़ा आ रहा था।
फिर आंटी ने अपनी कमीज़ उतारी फिर सलवार उतारी।
फिर मेरे लंड को चूसने लगी। फिर मैं आंटी की ब्रा खोलने
की कोशिश कर रहा था तो आंटी मुस्करा कर बोली- बेटा,
मैं खोल देती हूँ। फिर आंटी ने ब्रा खोल दी और
पैंटी भी उतार दी। अब आंटी का गोरा गोरा जिस्म मेरे
सामने पूरा नंगा था। आंटी ने अपने बड़े बड़े स्तन मेरे लंड पर
रख दिये और अपने वक्ष से मुझे चुदाई का मज़ा दे रही थी।
कुछ देर बाद मैं आंटी की चूत को चाटने लगा।
आंटी की सेक्सी सेक्सी आवाज़ें निकल
रही थी आआआआह्हहह्हह्ह ऊऊऊह्ह्हह
बेटा आआआह्हह्हह्हह्हह ज़ोर से बेटा आआआह्हह्हह्हह्ह
तेरी आंटी प्यासी है मेरी प्यास बुझा दे बेटा।
आआआअह्हह्हह्ह। आंटी ने कहा- अब अपना लंड मेरी चूत में
डालो ! प्यासी है मेरी चूत, प्यास बुझाओ जल्दी। मैंने
आंटी की दोनों टांगों को अपने हाथों से अपने कंधों पर
रखा और चूत पर लंड रखा। आंटी की चूत टाइट
हो रही थी। मैंने
हल्का सा धक्का दिया तो आंटी की चीख निकल गई और
आंटी ने कहा- आराम से डालो ! क्या जल्दी है तुमको? मैंने
कहा- आंटी, अब आराम से डालूँगा। फिर मैंने हल्के हल्के झटके
लगाने शुरु कर दिये। मेरे धक्कों से आंटी को मज़ा आ
रहा था। आंटी की आवाज़ें निकल रही थी- ऊओह्हह्ह्ह
ऊफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़ हाआआ। और डालो और डाल आज मेरी चूत
को मज़ा दे दो प्लीज़। तेज़ करो। मैंने तेज़ कर दिया।
आंटी ने मुझे बेड पे मुझे सीधा लिटा दिया और मेरे लंड के
ऊपर अपनी चूत रख दी और ज़ोर-2 से हिलने लगी और
चिल्लाने लगी- आह्हह्हह्हह्हह
बेटा बेटा आआआआह्हह्हह्हह्हह्ह मज़ा आ गया तुम्हारा लंड
अब मेरी प्यास बुझा देगा ! और ज़ोर-2 से ऊपर नीचे होने
लगी, ऐसे में मेरे लंड को भी दर्द हो रहा था। आंटी और मैं
दोनों पागल हो गये और मैंने आंटी को उठा लिया और नीचे
लिटा कर उनकी टांगें खोल दी और फिर से चुदाई शुरु कर
दी, आंटी झड़ने वाली थी। हमको 15-20 मिनट हो गये थे
और मेरा भी पानी निकलने वाला था। आंटी ने कहा- अंदर
नहीं निकालना। मैंने कहा- ठीक है आंटी। अब मैंने
अपना लंड निकाल लिया और आंटी के स्तनों पर
पानी निकाल दिया। फिर आंटी ने मेरा लंड चूसा और
पानी पी गई। 15 मिनट तक हम नंगे ही बेड पर लेटे रहे।
फिर मैंने आंटी से कहा- आंटी। मुझे आप की गाँड मारनी है।
आंटी ने जवाब दिया- आज से सब कुछ तुम्हारा है बेटा ! यह
गाँड भी तुम्हारी है ! जब बोलोगे, दे दूंगी। मैंने कहा-
अभी मिल सकती है? आंटी ने कहा- अभी क्यों नहीं। आंटी ने
फिर मेरे लंड को चूसना शुरु किया, 5 मिनट के बाद मैं
आंटी की मोटी मोटी गाँड पर अपनी ज़बान फेरने लगा।
आंटी ने कहा- यह क्या कर रहे हो? आज तक किसी ने
मेरी गाँड पर ज़बान नहीं फेरी ! मैंने जवाब दिया-
आंटी एक ब्लू मूवी में मैंने देखा था। आंटी ने कहा-
तुमको तो बहुत कुछ पता है सेक्स के बारे में। अब
आंटी कुतिया स्टाइल में थी और मेरा लंड बेचैन
था मोटी गोरी गोरी मोटी मोटी गाँड में जाने के लिये।
आंटी ने कहा- आराम आराम से डालना ! यह चूत नहीं है
गाँड है। बहुत दर्द होता है। मैंने कहा- आंटी, आप फ़िक्र
नहीं करें, मैं आराम से करूंगा। मैंने अब आंटी की गाँड में
हल्का सा झटका दिया, आंटी को दर्द हुआ, चीख निकल
गई- आआआह्हह्ह हरामी बाहर निकाल ! फट जायेगी ! रहम
कर आआआह्हह नो बेटा प्लीज़्ज़ अह्हह्ह ऊऊऊईईए माआ
मम्मी आअह्हह्ह बाहर निकाल। फिर मैंने अपनी स्पीड
हल्की कर दी। अब हल्के हल्के मेरा पूरा लंड आंटी की गाँड
में जा चुका था और आंटी को भी मज़ा आ रहा था।
आंटी को भी बहुत मज़ा आया गाँड में लंड ले कर। मैंने
आंटी को कहा- आंटी, पानी निकलने वाला है ! आंटी ने
कहा- निकाल लो। फिर आंटी ने सारा पानी फिर से
पिया और लंड को चूसने लगी। अब जब भी मौका मिलता है
मैं आंटी की प्यास बुझाता हूँ।

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